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कच्चे रास्ते, पेयजल संकट भाकली-बी की पहचान, वर्षों से नहीं हो रहा समस्याओं का समाधान

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गांव भाकली बी स्थित बस स्टैंड का जर्जर भवन। - फोटो : Rewari
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कोसली। उपमंडल मुख्यालय से महज एक किलोमीटर दूरी पर स्थित गांव भाकली-बी के ग्रामीण लंबे समय से पेयजल संकट व कच्चे रास्तों की समस्याओं से परेशान हो रहे हैं। बड़ा गांव होने के बाद भी पंचायत घर का नहीं होना ग्रामीणों को काफी खल रहा है। 9 हजार की आबादी वाले इस गांव में चार हजार से अधिक मतदाता है। ये मतदाता एक सरपंच व 9 पंचों का चयन करते हैं, लेकिन यहां समस्याओं की एक बड़ी सूची है। हालांकि इस बार ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे उम्मीदवार के हाथों में गांव ही बागडोर सौंपेंगे, जो गांव की सभी समस्याओं को प्राथमिकता से हल कराएगा। इसके साथ ही संभावित प्रत्याशियों ने भी घर-घर जाकर वोट मांगनी शुरू कर दी है।
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ग्रामीणों का कहना है कि गांव कि 7 वर्ष पूर्व अलग पंचायत बनी है, जिसमें शहर की आबादी के साथ-साथ आसपास बसी एक दर्जन नई कालोनियों को भी शामिल किया गया हैं। लेकिन यहां पीने के पानी व कच्चे रास्तों की समस्या बड़ी विकट है। गांव के बाहर बना बस स्टॉप भी बदहाली के कगार पर पहुंच गया है।
-इन सुविधाओं का अभाव
गांव भाकली बी में प्राथमिक पाठशाला, डाकघर, स्वास्थ्य सुविधाओं का लंबे समय से अभाव है। सफाई की भी कोई व्यवस्था नहीं है। आंगनबाड़ी केंद्र भी किराये के भवन में चलाया जा रहा है। पेयजल का भी संकट बना हुआ है।
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क्या कहते हैं निवर्तवान सरपंच
मेरे कार्यकाल में करीब दो करोड़ रुपये की विकास राशि आई थी, जिससे छह से अधिक कॉलोनियों के रास्ते पक्के कराए गए थे। इसके अलावा गांव की अन्य छोटी-बड़ी समस्याओं का समाधान कराया। पेयजल के लिए भी काफी प्रयास किए गए। इसके अलावा गांव में सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराया।
-हरिओम ठेकेदार, निवर्तमान सरपंच।
क्या कहते हैं ग्रामीण
गांव में काफी समस्याएं हैं। पंचायत के चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मीदवार गांव के सदस्य हैं, लेकिन जो भी उम्मीदवार गांव की मुख्य समस्याओं का समाधान कराएगा उसे ही वोट देंगे। गांव में कच्चे रास्ते, पंचायत घर, नया बस अड्डा, ओवरब्रिज के साथ में अंडर पास जैसी सुविधा का होना बेहद जरूरी।
-बिजेंद्र, ग्रामीण
भाकली-बी गांव के आसपास कॉलोनियों के साथ में बाजार भी है। यहां सफाई व्यवस्था की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए। गांव में पीने के पानी की समस्या गंभीर है। कच्चे रास्तों को ठीक करने वालों को मतदान करेंगे।
-मुंशीराम शर्मा
गांव में स्ट्रीट लाइटों का लंबे समय से अभाव है। शाम होते ही अंधेरा छाने लगता है। पेयजल का भी संकट है। अधिकतर गलियां कच्ची है। इसलिए विकास को प्राथमिकता देने वालों को वोट देंगे।
-सुरेंद्र कुमार, ग्रामीण
उनका गांव आसपास के गांवों में सबसे बड़ा है। शहर के भी नजदीक है। इसके बाद भी यहां समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। प्रशसान को भी कई बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन हालात ज्यों के त्यों बने हुए हैं।
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-दर्शन सिंह, ग्रामीण
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