ईंट भट्ठे से निकल रहा धुआं। स्रोत : शिकायतकर्ता
रेवाड़ी। खरगवास में संचालित ईंट-भट्ठे (रारिया ब्रिक्स उद्योग) पर हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) ने सख्त रुख अपनाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी कर इकाई को बंद करने की चेतावनी दी है। नोटिस में वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की विभिन्न धाराओं के उल्लंघन का उल्लेख किया गया है।
नोटिस के अनुसार संबंधित ईंट भट्ठे को पूर्व में संचालन की सहमति (सीटीओ) प्राप्त थी लेकिन इसे 6 अप्रैल 2023 को आदेश जारी कर रद्द कर दिया गया था। इसके बावजूद इकाई के संचालित पाए जाने पर विभाग ने गंभीर आपत्ति जताई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार 11 मार्च को प्राप्त शिकायत के आधार पर टीम ने भट्ठे का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान पाया गया था कि बिना वैध अनुमति के भट्ठा चालू था। साथ ही इकाई में ईंधन के रूप में कोयले का उपयोग किया जा रहा था जो पर्यावरणीय मानकों के खिलाफ है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि इकाई द्वारा जानबूझकर निर्देशों का उल्लंघन किया जा रहा है। ऐसे में इकाई के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
विभाग ने संचालक को 15 दिनों के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है कि उनकी इकाई को बंद क्यों न किया जाए। साथ ही यह भी पूछा गया है कि उनकी बिजली आपूर्ति क्यों न काटी जाए और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (जुर्माना) क्यों न लगाया जाए। चेतावनी दी है कि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर यह मान लिया जाएगा कि संचालकों के पास कोई स्पष्टीकरण नहीं है।
इसके बाद विभाग संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई करते हुए इकाई को बंद करने, बिजली आपूर्ति काटने और जुर्माना लगाने जैसे कदम उठा सकता है।
अवैध रूप से चल रहे ईंट-भट्ठे पर कार्रवाई की मांग तेज
गांव खरगवास निवासी सूबेदार विक्रम सिंह (सेवानिवृत्त) ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को शिकायत भेजकर भट्ठे को तुरंत बंद कर सील करने और लाइसेंस रद्द करने की मांग की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि रारिया ब्रिक्स उद्योग गंभीर नियम उल्लंघनों के बावजूद लगातार संचालित हो रहा है। इससे सवाल उठ रहे हैं कि संबंधित विभाग कार्रवाई करने में देरी क्यों कर रहा है। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि विभाग की ढिलाई से यह प्रतीत होता है कि भट्ठा संचालकों के प्रति नरमी या पक्षपात बरता जा रहा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि लाइसेंस प्राप्त करने के लिए फर्जी एनओसी और दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। इस मामले में भट्ठा संचालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है।