कोसली। एक समय वो भी था जब होली पर्व का एक माह पहले होली का डांडा गड़ते ही गांव-गांव एवं गली-गली में महिलाएं, बच्चे व युवा होली के गीतों के साथ सांग का खेल शुरू हो जाता था, लेकिन बदलते समय के साथ ही सांग लुप्त हो गया है। इन सबके बीच कोसली क्षेत्र के गांवों में त्योहारों पर पुरानी परंपरा का पालन किया जा रहा है। क्षेत्र गांवों में होली के पर्व पर बजने वाला धमाल व होली गायन की परंपरा को कायम रखे हुए हैं।
नठेड़ा गांव में होली गायन की शुरूआत महाशिवरात्रि के दिन से होती है। इस वर्ष भी होली गायन का शुभारंभ गायन पार्टियों को भाजपा के वरिष्ठ नेता वीरकुमार यादव ने गुड़ की भेली देकर किया गया था, जो हर वर्ष की भांति होली के एक सप्ताह बाद बासोड़ा के दिन क्षेत्र के प्रसिद्ध मठ धाम कोसली पर समापन होगा। विभिन्न गांवों की होली गायन पार्टियां गांव के बुलावे पर एक गांव से दूसरे गांव में होली गायन का अनूठा कार्यक्रम किया जाता है। बदलती पुरानी परंपराओं में चार चांद लगा कर युवाओं को हमारे पुराने रीति-रिवाजों की न केवल याद दिलाते हैं, बल्कि युवाओं को होली गायन में साथ लेकर जाते हैं।
क्षेत्र के गांवों में बुलावे पर जाने वाली प्रत्येक होली गायन पार्टी को गुड़ की भेली व श्रद्धा अनुसार भेंट देकर विदा किया जाता है। गांव जाहिदपुर होली गायन पार्टी के सदस्य थावर सिंह बताते हैं कि होली गायन की परंपरा हमारे पूर्वजों के समय से चली आ रही है। सभी गांवों से होली गायन पार्टियां महाशिवरात्रि के दिन नठेड़ा में एकत्र होती है। वहां से होली गायन की शुरूआत होती है। इसका समापन कोसली मठ पर बासोड़ा के दिन होता है। होली गायन में जहां वृद्ध शामिल होते हैं। वहीं युवा भी होली गायन में बढ़चढ़ कर भाग लेते हैं। उन्होंने बताया कि होली गायन पार्टी को बुलाने से पहले उस गांव के सरपंच की तरफ से लिखित में नियंत्रण आने के बाद में उस गांव में होली गायन पार्टियां जुटती है। पार्टी सहित विभिन्न गांवों से हर साल नारनौल में रोहतक रेडियो के लिए होली गायन रिकार्डिंग में भी भाग लेते हैं। सबसे बड़ा होली गायन क्षेत्र के गांव कंवाली में फाग के दिन होता है। होली गायन के समय मिलने वाला पैसा व गुड़ समापन के बाद सभी होली गायन पार्टियां गौशाला में दान कर देती है।