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छुट्टी खत्म, खुले स्कूल, मौज मस्ती में बीता पहला दिन

Sat, 02 Jul 2016 12:44 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला
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स्‍कूल खुले, बच्चे पहुंचे कक्षाओं में - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जून की तीस तारीख को ही स्कूली बच्चे स्कूलों जाने के लिए घर में किसी कोने पड़े अपने बैग की ढूंढने में लग गए। हालांकि एक जुलाई को सुबह स्कूल जाने की जल्दी में कुछ बच्चे एक-दो किताबें भूल गए तो कोई अपना टिफिन। शुक्रवार को अमर उजाला की टीम ने जब जिले के स्कूलों में रियलिटी चैक किया तो यहां पर अध्यापकों की संख्या तो पूरी दिखी,लेकिन विद्यार्थियों की संख्या एक चौथाई ही थी। वहीं जिले के निजी स्कूलों में इनकी संख्या लगभग पूरी दिखी। बच्चों से बात करने पर उन्होंने बताया कि आज का दिन तो केवल मौज मस्ती एवं नए छात्रों को परिचय में ही बीता।
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गुड़गांव बार्डर पर जिले का राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल
यहां पर अमर उजाला की टीम पहुंची तो कुछ बच्चे जहां पढ़ते दिखाई दिए वहीं कुछ मौज मस्ती में दिखे। दसवीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों जहां पढ़ाई के संवेदनशील दिखे, वहीं छोटी कक्षाओं के बच्चे मौज मस्ती के मूड में दिखे।

मॉडल टाऊन हिंदू स्कूल
दोपहर के डेढ़ बजे कक्षाओं में कुछ कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या महज 10-12 तो कहीं पर 25-30। शिक्षकों से बात करने पर उन्होंने बताया कि स्कूल के पहले दिन बच्चों में उत्साह बहुत ज्यादा रहता है, लेकिन बच्चों के अपने रिश्तेदारों के यहां गए हुए होने के कारण वह एक दो दिन देरी से आते हैं।
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-यह बोले छात्र
स्कूल के पहले दिन छात्रों से बात की गई तो उनके द्वारा बताया गया अनुभव भी अनोखा था। कुछ उत्साह में दिखे तो कुछ बोले पंद्रह दिन की और छुट्टी मिलनी चाहिए थी। कापड़ीवास के राजकीय सीनियर सेकेंडर स्कूल में ग्यारहवीं कक्षा के छात्र बलराम ने बताया कि आज का दिन बहुत अच्छा रहा। एक महीने की लंबी छुट्टी के बाद आज के दिन का इंतजार रहता है। 12वीं कक्षा के छात्र साहिल ने कहा कि छुट्टी पंद्रह दिन की और होनी चाहिए थी। इसी के साथ 12वीं कक्षा के जितेंद्र का कहना है कि स्कूल उनके परिवार जैसा है, बिना परिवार के मन कैसे लगेगा।

वर्जन- विद्यार्थियों के साथ अध्यापकों में भी स्कूल खुलने का उत्साह होता है। शुक्रवार को पहले दिन बच्चे स्कूल के समय से पहले ही पहुंच जाते हैं। वहीं अध्यापक भी विद्यालयों पहुंचकर अच्छा महसूस करते हैं।
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-धर्मबीर बल्डोदिया, डीईओ, रेवाड़ी
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