दो दिन बिजली हड़ताल ने शहर के लोगों का पसीना निकाल दिया है, इधर जिले की नहर में पानी नहीं आने के कारण निकले पसीने की भरपाई के लिए शहरवासियों को पेयजल भी नसीब नहीं हो रहा है। पीएचईडी द्वारा 26 जून से पानी की राशनिंग कर पेयजल की आपूर्ति की जा रही है जो की नाकाफी साबित हो रही है। राशनिंग के बावजूद शहर की ढाई लाख की आबादी के लिए महज दो दिन का पेयजल शेष रह गया है।
यदि अगले दो दिनों में नहर में पानी नहीं आया तो पहले से बिजली संकट से परेशान में शहरवासियों में हाहाकार मचना निश्चित है। गौरतलब है शहरवासियों को जलापूर्ति के लिए एक दिन में लगभग 16 लाख क्यूसेक पानी की जरूरत पड़ती है। सरकार द्वारा लोगों के पेयजल की आपूर्ति नहीं कर पाने की स्थिति में जिले के लोग एक महीने में लगभग एक करोड़ अस्सी लाख का पेयजल खरीदकर पीने को मजबूर हैं।
चार जून तक चला था पानी
शहर की ढाई लाख की आबादी से साथ जिले की लगभग ग्यारह लाख की आबादी पूरी तरह से नहरी पानी पर निर्भर करती है। जिले में जवाहर लाल नेहरू कैनाल से पानी की सप्लाई होती है। बीती टर्म में चार जून तक जिले की नहर में पानी चला था। इस बार की टर्म में 26 जून को नहर में पानी आना था, लेकिन चार दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक नहर में पानी आने की संभावना नहीं दिख रही है। शहर की पेयजल की आपूर्ति करने के लिए दिन में औसतन लगभग 20 घंटे पानी की सप्लाई की जाती है। 26 जून से पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट की ओर से एक दिन छोड़कर एक दिन का पानी दिया जा रहा है। वह भी पहले की तुलना में कम।
भूजल में फ्लोराइड की अधिकता करती है नहरी पानी पर निर्भरता
जिले में गिरता भूजल स्तर, खारापन एवं फ्लोराइड की अधिकता ने शहर की आबादी के साथ जिले के लोगों को निर्भरता नहरी पानी पर है। केंद्रीय वाटर बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार जिले का खोल ब्लॉक की स्थिति इनती खराब हो चुकी है कि उसे नोटिफाइड तक किया जा चुका है। इधर जाटुसाना ब्लॉक को क्रिटिकल एवं नाहड, रेवाड़ी,बावल को बहुत ज्यादा दोहन के कारण संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है।
1.80 करोड़ का पानी पीते हैं शहरवासी
शहर में पेयजल की कमी का फायदा शहर में टैंकर चालक उठा रहे हैं। शहर में दो दर्जन से अधिक अवैध रूप से पानी की कमी का फायदा उठाकर पांच से लेकर सात सौ तक में पानी के टैंकर सप्लाई कर रहे हैं। इन दिनों शहर में लगभग 100 वाटर केंपर संचालक पेयजल की सप्लाई कर रहे हैं। कैंपर संचालक एक दिन में औसतन 12 लाख लीटर पेयजल सप्लाई करते हैं। इस तरीके से एक छह लाख का पेयजल सप्लाई हो रहा है। इस तरह एक महीने में कैंपर से बिकने वाले पानी की कीमत लगभग एक करोड़ अस्सी लाख हो जाती है। जिले में पेयजल के बाजार से समझा जा सकता है कि जिले में पीने के पानी की क्या व्यवस्था है।
आज इन क्षेत्रों में नहीं आऐगा पानी
झज्जर रोड, जैनपुरी, तोपचीवाड़ा, कायस्थवाड़ा, स्वामीवाड़ा, माडॅल टाऊन, अनाज मंडी, वैधवाड़ा, मुक्तिवाड़ा, राजीव नगर, केवल बाजार, गुर्जरवाडा एवं मीनी महल सहित शहर के अंदर के हिस्सों में पेयजल की सप्लाई नहीं होगी।
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वर्जन-
नहर की सफाई का काम चल रहा था। उसके चलते कुछ देरी जरूर हुई है। बृहस्पतिवार देर रात या फिर शुक्रवार को अल सुबह नहर मे पानी पहुंच जाएगा।
-एस.के सिंगला, एसई, सिंचाई विभाग
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वर्जन-
पेयजल की कमी के चलते राशनिंग कर पानी की सप्लाई की जा रही है। शहरवासियों के लिए अभी तक केवल दो दिन का पानी बचा हुआ है।
-अशोक डागर, कनिष्ठ अभियंता,पीएचईडी