रेवाड़ी। एक समय दक्षिण हरियाणा की जीवनरेखा कही जाने वाली साहबी नदी (जिसे बाद में नजफगढ़ ड्रेन कहा गया) आज प्रदूषण की चपेट में आकर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है।
अक्तूबर में मसानी बैराज से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी की प्रधान पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि साहबी नदी का मूल स्वरूप नजफगढ़ ड्रेन के नाम के पीछे दब गया है, जो पर्यावरण और इतिहास दोनों के साथ अन्याय है।
न्यायालय ने कहा था कि साहबी नदी एक स्वतंत्र प्राकृतिक जलधारा है। इसे केवल नाला या ड्रेन कहना इसकी आत्मा का अपमान है। इस नदी के मूल नाम और स्वरूप को पुनर्स्थापित किया जाना चाहिए। एनजीटी ने इस मामले में केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी आवश्यक पक्ष के रूप में शामिल करते हुए उन्हें रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। ये मामला काफी चर्चा में था।