संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जियो फेसिंग से हाजिरी लगाने की नई व्यवस्था के विरोध में सोमवार को सरकारी अस्पताल के डॉक्टर, नर्स, लैब टेक्नीशियन समेत अन्य स्वास्थ्यकर्मी एक घंटे तक हड़ताल पर रहे। इसके चलते चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित रही। स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अस्पताल परिसर में नारेबाजी की। इस दौरान मरीजों को इंतजार करना पड़ा। 11 बजे से ओपीडी शुरू होने पर मरीजों ने राहत की सांस ली।
सिविल अस्पताल में सोमवार को अन्य दिनों की अपेक्षा मरीजों की अधिक भीड़ होती है। जियो फेसिंग के जरिये हाजिरी लगाने के विरोध में डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने प्रदर्शन किया। एक घंटे तक चले विरोध प्रदर्शन के दौरान मरीज इंतजार करते रहे। इस दौरान मरीज इलाज के लिए भटकते रहे।
धरना प्रदर्शन संपन्न होने के बाद 11 बजे ओपीडी शुरू हुई तो मरीजों को राहत मिली। एक घंटे की हड़ताल के दौरान ओपीडी के साथ एक्स-रे भी ठप रहा। आपातकालीन सेवाएं पहले की तरह जारी रहीं। स्वास्थ्यकर्मियों ने कहा कि अगर सरकार ने उनकी मांग नहीं मानी तो बड़ा आंदोलन होगा। डॉक्टर्स और कर्मचारियों का कहना है कि 10 अगस्त को बैठक में बड़े आंदोलन का फैसला लिया जा सकता है।
स्वास्थ्य कर्मचारियों ने सीएमओ नरेंद्र दहिया को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में डॉक्टर अजय, नर्सिंग प्रधान राजबाला, लैब टेक्नीशियन के आनंद खोश्या, निर्मला आदि मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि मोबाइल उनकी निजी संपत्ति है। इसमें एप इंस्टॉल कराकर उनकी लोकेशन और निजी डेटा सरकार लेगी जो उनके अधिकारों का हनन है।
कर्मचारियों ने कहा कि जियो फेसिंग एप के जरिए हाजिरी की व्यवस्था उचित नहीं है। पहले अस्पताल में बायोमैट्रिक से हाजिरी लगती थी अब नया सिस्टम करने की क्या जरूरत है।
स्वास्थ्यकर्मियों ने कहा कि जियो फेसिंग एप के जरिए कर्मचारी जब अपने कार्यस्थल पर पहुंचते हैं, तो उनकी मोबाइल लोकेशन के माध्यम से उपस्थिति दर्ज होती है। कर्मचारियों का कहना है कि यह प्रणाली न केवल उनकी निजता में हस्तक्षेप है, बल्कि तकनीकी समस्या आने पर भी उनकी हाजिरी प्रभावित हो सकती है। चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांग को गंभीरता से नहीं लिया और फेसिंग एप की अनिवार्यता को वापस नहीं लिया, तो ये बस विरोध की एक शुरूआत है, आने वाले दिनों में वे बड़ा आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।