जिले की नौ लाख से अधिक आबादी वाले सबसे बड़े 100 बेड का नागरिक अस्पताल वेंटिलेटर से महरूम है। इससे यहां पर आपात स्थिति में मरीज की जान पर बन आती है और मरीजों को रैफर करना पड़ता है।
जानकारी के अनुसार अगस्त माह में 1154 मरीज आपात स्थिति में ट्रॉमा सेंटर पहुंचे, लेकिन यहां पर वेंटिलेटर सहित अन्य जरूरी सुविधाओं के अभाव में आधे मरीजों को यहां से रैफर करना पड़ा। मेडिकल के नियमानुसार किसी भी अस्पताल में वेंटिलेटर होना आवश्यक है। वहीं कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वेंटिलेटर के अभाव में मरीज को रैफर करने के बाद यदि मृत्यु हो जाती है तो ऐसे में तीमारदार अस्पताल प्रशासन को पार्टी बनाकर केस कर सकता है।
इन स्थितियों में जरूरी है वेंटिलेटर
डॉक्टरों के अनुसार किसी भी अस्पताल में मरीज की तबीयत बिगड़ने पर ऑक्सीजन सप्लाई के लिए वेंटिलेटर रखा जाना जरूरी है। यदि समय पर वेंटिलेटर पर नहीं रखा गया तो मरीज की जान भी जा सकती है। हार्ट पेसेंट एवं हैड इंजरी वाले मरीज को बिना वेंटिलेटर पर रखे जाने के अभाव में अस्सी फीसदी से ज्यादा उसकी जान जाने के चांस रहते हैं।
सबसे बड़ी मार गरीब तबके पर
कोई बड़ा एक्सीडेंट या फिर अन्य आपात स्थिति में आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति का सहारा सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं होती हैं। ऐसे लोग जो अपना उपचार निजी अस्पतालों में करा सकते हैं, उनके लिए वेंटिलेटर कोई बड़ी चीज नहीं है। लेकिन ऐसे लोग केवल नागरिक अस्पताल पर निर्भर हैं, उनकी जान खतरे में बनी रहती है।
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यह बोले कानून के जानकार
नागरिक अस्पताल में वेंटिलेटर नहीं होने से जान तक जा सकती है। ऐसे में वेंटिलेटर के अभाव में यदि किसी जान जाती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की होनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग के साथ यहां के जन प्रतिनिधियों को भी इसके लिए प्रयास करने जरूरी हैं।
-शमशेर यादव, प्रेसिडेंट बार एसोसिएशन, रेवाड़ी
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नागरिक अस्पताल में लोग आपात स्थिति में ही पहुंचते हैं,लेकिन अति आवश्यक सेवा वेंटिलेटर नहीं होना गंभीर विषय है। इसका सबसे बड़ा खामियाजा गरीब लोगों को उठाना पड़ता है,जो निजी अस्पताल में नहीं जा सकता है।
-रविंद्र यादव, वाइस प्रेसिडेंट बार एसोसिएशन, रेवाड़ी।
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नागरिक अस्पताल में वेंटिलेटर जैसी लाइफ सेविंग सर्विस नहीं होना सरकार की लोगों के स्वास्थ्य एवं उनके जीवन के प्रति गंभीरता को दर्शाने के लिए पर्याप्त है। इसके अभाव में यदि मरीज को रैफर करने के बाद मरीज की जान जाती है तो स्वास्थ्य विभाग को पार्टी बनाया जा सकता है।
-राजेंद्र यादव, एडवोकेट
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अस्पताल में जरूरी सेवाएं भी उपलब्ध नहीं होना सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली बताने के लिए काफी है। यहां के जन प्रतिनिधियों को आगे आकर अस्पताल में इस जरूरी सुविधा को उपलब्ध कराने के लिए प्रयास करने होंगे।
-नवल सिंह जांगू, एडवोकेट