फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्वास्थ्य मंत्री की फटकार नहीं असरदार

विज्ञापन
विज्ञापन
स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की फटकार कर डॉक्टरों पर कम असर दिखाई दिया। शुक्रवार को शहर के नागरिक अस्पताल में दवाई लेने पहुंचे मरीजों पहले की तरह ही कुछ दवाई बाहर के निजी मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ी।
विज्ञापन

वीरवार को रेवाड़ी पहुंचे प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में सभी दवाएं नहीं मिलने के सवाल पर कहा था कि प्रदेश के वेयर हाऊस दवाओं से भरे पड़े हुए हैं। ऐसे में मरीजों को बाहर से दवाएं लिखने का सवाल ही नहीं बनता है। यदि किसी डॉक्टर ने दवाई बाहर की लिखी तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। अमर उजाला की ओर से शुक्रवार को इसकी पड़ताल की गई तो पाया गया तो की कुछ मरीजों को नागरिक अस्पताल के मेडिकल स्टोर से पूरी दवाई नहीं मिली तो उन्हें बाहर से खरीदनी पड़ी।
-लाईन में लगने के बाद भी नहीं मिली दवाई: मनोज
गांव डालिया निवासी मनोज कुमार ने बताया कि उसके हाथ-पैर सुन्न हो जाते है। इसकी दवाई लेने के लिए काफी देर लाईन में लगने के बाद नंबर आया। लेकिन फिर भी दवाई पूरी नहीं मिली। इसके अलावा टायलेट की समस्या से भी परेशान था लेकिन उसकी भी पूरी दवाई नहीं मिली।
विज्ञापन

-नहीं मिलती पूरी दवाई: लाली
बुढ़ी बावल निवासी लाली देवी ने बताया कि उसे शौच जाने में परेशानी हो रही थी। पहले डाक्टर के लिए काफी इंतजार करना पड़ा। बाद में दवाईयों के लिए लाईन में लगने बाद भी पूरी दवा नहीं मिली। अब बाहर से महंगे दामों पर दवाई खरीदनी पड़ेगी।
नहीं मिली पत्थरी की दवा: ओमप्रकाश
हरी नगर निवासी ओमप्रकाश ने बताया कि उसे पत्थरी की शिकायत है। पत्थरी होने के वजह से हर समय पेट में दर्द होता रहता है। जब वह दवाई लेने गया तो उसे एक भी दवाई नहीं मिली। बाहर से दवाईयां काफी महंगी आती है। लेकिन परेशानी ज्यादा होने पर महंगे दामों पर दवाई लेना मजबूरी बन जाती है।
पेट के दर्द की नहीं मिली पूरी दवाई: रवि
गांव धवाना निवासी रवि कुमार ने बताया कि उसके पेट में काफी दिनों से दर्द रहता है। लेकिन अस्पताल से पूरी दवाई नहीं मिल पाती है। पहले डाक्टर से दिखाने के लिए घंटो लाईन में लगो, फिर दवाई के लिए काफी देर में नंबर आता है। लेकिन दवाई मिलती भी नहीं है।
आंख की दवाई खरीदनी पड़ी बाहर से: मुकेश
गांव लालपुर निवासर मुकेश कुमार ने बताया कि उसके 6 वर्षीय बेटे की ऑख में दिक्कत है। दर्द की वजह से बच्चा परेशान रहता है, जिस वजह से बच्चे को सोने में भी दिक्कत होती है। लेकिन अस्पताल में दवाईयां पूरी नहीं मिलती है। बाहर से लेनी पड़ती है।
बाहर मिलती है महंगी दवाई: महेंद्र
गांव कसौली निवासी महेंद्र ने बताया कि उसके 2 वर्षीय बच्चे को बुखार है। बुखार होने की वजह से दिन रात बच्चा रोता रहता है। काफी देर लाईन में लगने के बाद भी बच्चे की दवाई नहीं मिली। बच्चे के बुखार को देखते हुए अब बाहर से महंगे दामों पर दवाई खरीदना मजबूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें