रेवाड़ी। मानसून के दौरान जलभराव और दूषित पानी से फैलने वाली मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिले में निगरानी बढ़ा दी है। डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, टाइफाइड, हेपेटाइटिस-ए और डायरिया जैसी बीमारियों से लोगों को सुरक्षित रखने के लिए विभाग की टीमें सक्रिय हैं। प्रभावित क्षेत्रों में फॉगिंग, लार्वा नाशक दवा का छिड़काव और घर-घर सर्वे अभियान चलाया जा रहा है।
हर वर्ष जुलाई से सितंबर के बीच वेक्टर जनित बीमारियों के मामलों में वृद्धि होती है। कूलर, पानी की टंकियों, गमलों और पुराने टायरों में जमा पानी मच्छरों के पनपने का प्रमुख कारण बनता है। विभाग ने लोगों से सप्ताह में एक बार कूलर व अन्य बर्तनों का पानी बदलने और पानी की टंकियों को हमेशा ढककर रखने की अपील की है।
डेंगू एवं मलेरिया नियंत्रण नोडल अधिकारी डॉ. जोगेंद्र तंवर ने बताया कि बरसात में मच्छर जनित और जलजनित बीमारियों का खतरा अधिक रहता है। मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के लिए पूरे बाजू के कपड़े पहनें, मच्छरदानी का उपयोग करें और घर के आसपास पानी जमा न होने दें।
जलजनित बीमारियों से बचने के लिए साफ, उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी पीना चाहिए। भोजन को ढककर रखना और खाने से पहले साबुन से हाथ धोना भी जरूरी है। आशा कार्यकर्ता, एएनएम, एमपीएचडब्ल्यू और अन्य स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर बुखार सर्वे करेंगे तथा मच्छरों की ब्रीडिंग की जांच करेंगे। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने की अपील की है।