फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मरीज और तीमारदार परेशान, मरीज को कैसे ले जाएं अस्पताल

Sun, 04 Sep 2016 01:01 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला
विज्ञापन
मासूम को एंबुलेंस ने कुचला - फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
विज्ञापन
एक्सीडेंट और आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल लाने वाली सरकारी एंबुलेंस बीमार चल रही है। जिले की 17 सरकारी में से नौ एंबुलेंस विभिन्न कारणों से एक्शन में नहीं हैं। इसके अलावा पांच नई एंबुलेंस भी पेट्रो कार्ड के अभाव में पार्किंग में खड़ी हैं। वर्तमान में हालात यह हैं कि जिले के कई स्वास्थ्य केंद्रों पर एंबुलेंस नहीं हैं।
विज्ञापन


मुख्यालय में खड़ी दो एंबुलेंसों की एक साथ ड्यूटी लग जाती है तो आपात हालात बदतर हो जाते हैं। ऐसे में मरीज और तीमारदार मरीज को अस्पताल या अन्य सेंटर पर ले जाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। इन समस्याओं से अनजान नोडल अधिकारी कहते हैं कि दस एंबुलेंस ऑन रोड हैं। केवल आठ एंबुलेंस के भरोसे सरकारी व्यवस्था लड़खड़ा रही है।  

जानकारी के अनुसार जिले के स्वास्थ्य केंद्रों में 17 एंबुलेंस तैनात थीं। वर्तमान में नौ एंबुलेंस कंडम स्थिति में हैं। इसमें से चार खराब हैं तीन को सर्विस केंद्रों में भेजा गया है। इसके अलावा किलकारी एंबुलेंस भी खराब चल रही है। दान में दी गई दो एंबुलेंस और तीन सरकारी नई एंबुलेंस भी पेट्रोल के अभाव में नहीं चल रही है।  
विज्ञापन


नागरिक अस्पताल की व्यवस्था राम भरोसे
जिले में चल रही आठ एंबुलेंस में से दो नागरिक अस्पताल के लिए हैं। कई बार ऐसा होता है कि दोनों एंबुलेंस को आपात स्थिति में रोहतक भेजना पड़ता है। रोहतक जाने के बाद एक एंबुलेंस को कम से कम पांच घंटे का समय लौटने में लगता है। ऐसी स्थिति में यदि किसी गर्भवती महिला या गंभीर मरीज को एंबुलेंस की जरूरत पड़ जाए तो वह राम भरोसे ही रहता है।

हर छह घंटे में औसतन तीस कॉल
नागरिक अस्पताल स्थित कॉल सेंटर पर प्रत्येक छह घंटे में मरीजों की औसतन तीस कॉल आती हैं। अधिकतर मरीजों को इधर से कोई रेस्पांस नहीं मिलता है। कॉल आने पर जवाब मिलता है कि एंबुलेंस गई है। फ्री होने पर उपलब्ध हो पाएगी। ऐसे में सरकार की तरफ से प्रचारित नंबर पर यदि कोई आपात स्थिति में कॉल करता है तो उसकी तो जान पर बन सकती है।

यह है जिलेवार स्थिति
रेवाड़ी-2
नाहड़-1
कोसली-1
गुरावड़ा-1
खोल-1
बावल-1
धारूहेड़ा-1

सर्विस सेंटर पर हैं तीन एंबुलेंस
सरकारी व्यवस्था का आलम देखिए कि तीन माह से ज्यादा समय से तीन सरकारी एंबुलेंस सर्विस के लिए खड़ी हैं। सूत्रों के अनुसार विभाग की तरफ से सर्विस सेंटर वाले को पैसे नही देने के कारण तीनों एंबुलेंस वहां खड़ी हैं। स्वास्थ्य विभाग प्रशासन को इस बात की जानकारी होने के बावजूद कोई समाधान नहीं हो पाया है।

बीस मिले तो सुधर सकती है व्यवस्था
नियमानुसार कोई एंबुलेंस अधिकतम दो लाख किमी ही चल पाती हैं। इसके बाद उसे कंडम की श्रेणी में रख दिया जाता है। कमी के चलते अस्पताल की एंबुलेंस तीन लाख किमी तक चलाई जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग विशेषज्ञों के अनुसार यदि जिले में बीस एंबुलेंस सुचारु चलाई जाए तो सभी को समय पर यह सुविधा मिल सकती है।

पेट्रो कार्ड के अभाव में खड़ी हैं पांच एंबुलेंस
बावल औद्योगिक क्षेत्र की दो कंपनियों की तरफ से नागरिक अस्पताल को दो एंबुलेंस दान में दी गईं थीं। सरकारी लचर व्यवस्था का आलम देखिए कि सरकार की तरफ से पेट्रोल डलवाने के लिए बनाए पेट्रो कार्ड के अभाव में दो एंबुलेंस धूल फांक रही हैं। पिछले दिनों सरकार की तरफ से मुहैया कराई तीन नई एंबुलेंस भी पेट्रो कार्ड के अभाव में खड़ी हैं।

17 में से 10 एंबुलेंस ऑन रोड का दावा
एनएचएम के नोडल अधिकारी डॉ. लाल सिंह का दावा है कि जिले में 17 एंबुलेंस में से 10 ठीक चल रही हैं। सर्विस पर भेजी गाड़ियों को बिना सर्विस ही वापस मंगाया जा रहा है। इन्हें ठीक नहीं कराया जाएगा। इनकी जगह सरकार से मिली तीन और दान में मिली दो एंबुलेंस को उपयोग में लाया जाएगा। पेट्रो कार्ड की समस्या को शीघ्र सुलझा लिया जाएगा।
 
डहीना और सीहा में एंबुलेंस सेवा नहीं
खोल खंड के अधीन आने वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डहीना और सीहा में एंबुलेंस सेवा नहीं है। इसे लेकर इन क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले करीब 34 गांवों के ग्रामीण परेशान हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डहीना में तीन माह से एंबुलेंस नहीं है। एक एंबुलेंस उपलब्ध कराई थी लेकिन वह भी रेवाड़ी बुला ली गई। ऐसे में गर्भवती समेत एक्सीडेंटल केसों में लोगों को परेशानी होती है।

कोट
अस्पताल में एक एंबुलेंस उपलब्ध कराई थी, लेकिन उसे पिछले दिनों रेवाड़ी बुला लिया। अब गर्भवती महिलाओं को रेवाड़ी ले जाने के लिए रेवाड़ी से एंबुलेंस आती है।
- डॉ. अभिषेक सैनी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डहीना  

कोट
सीहा अस्पताल में शुरू से एंबुलेंस की कोई सुविधा नहीं है। कभी किसी मरीज और गर्भवती महिलाओं को रेवाड़ी ले जाना होता है तो खोल से एंबुलेंस आती है। - डॉ. सुरेंद्र सिंह, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सीहा
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें