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Rewari News: फर्जी आधार कार्ड बना कोर्ट में जमानतदार के रूप में किया था पेश

Tue, 11 Nov 2025 12:30 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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जिला न्यायालय रेवाड़ी। संवाद
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रेवाड़ी। फर्जी आधार कार्ड बनवाने और अदालत में पेश करने के मामले में आरोपी सीएससी संचालक नरेंद्र कुमार उर्फ बबली को राहत नहीं मिली है। रेवाड़ी की सेशन जज गुरविंदर सिंह वाधवा की अदालत ने आरोपी की ओर से दायर जमानत याचिका को अस्वीकार कर दिया है।
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अदालत ने आदेश में कहा कि आरोपी ने सह-अभियुक्तों के साथ मिलकर अपराध को अंजाम देने में सक्रिय भूमिका निभाई है। इसलिए फिलहाल उसे जमानत पर छोड़ा जाना न्यायोचित नहीं होगा। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि इसी मामले में सह-अभियुक्त विक्रम सिंह उर्फ विक्की की जमानत याचिका पहले ही 3 अक्तूबर को खारिज की जा चुकी है।
मामला पुलिस थाना मॉडल टाउन में 29 अगस्त 2025 को शिकायत मिली थी। इस मामले में आरोप हैं कि आरोपी विक्रम उर्फ विक्की ने अदालत में किसी अन्य व्यक्ति अजय कुमार के नाम पर जमानतदार के रूप में पेश होकर धोखाधड़ी की थी। इस दौरान उसने फर्जी आधार कार्ड और राजस्व रिकॉर्ड अदालत में जमा कराए थे।
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जब अदालत के रीडर संजय यादव को शक हुआ तो उन्होंने मामले की सूचना पुलिस को दी। पुलिस जांच में सामने आया कि विक्रम उर्फ विक्की ने कई फर्जी आधार कार्ड तैयार करवाए थे, जिनमें अलग-अलग नामों के साथ उसकी ही फोटो लगी थी। पुलिस जांच में पता चला कि यह नाईवाली पुल के पास नरेंद्र कुमार उर्फ बबली सीएससी केंद्र चलाता है।
सह-अभियुक्तों के खुलासे में नरेंद्र का नाम सामने आया था। पुलिस ने जब उसे गिरफ्तार किया, तो उसके पास से तीन फर्जी आधार कार्ड बरामद हुए। इन आधार कार्डों पर विक्रम उर्फ विक्की की ही तस्वीर लगी थी। पुलिस ने जांच के बाद विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।

नरेंद्र कुमार के अधिवक्ता ने कहा- वह निर्दोष, उसे झूठा फंसाया गया
अभियुक्त की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि नरेंद्र कुमार निर्दोष है और उसे झूठा फंसाया गया है। उसका नाम केवल सह-अभियुक्त के खुलासे में आया है, जो कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं है। अधिवक्ता ने कहा कि पुलिस ने उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं पाया। वह परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है, दो महीने से न्यायिक हिरासत में है और जांच पूरी हो चुकी है, इसलिए उसे जमानत दी जानी चाहिए।
वहीं, सरकारी अधिवक्ता ने कोर्ट में कहा कि आरोपी ने सह-अभियुक्तों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और अदालत में गलत जानकारी प्रस्तुत की। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने आधार कार्ड की एडिटिंग और फर्जी डेटा एंट्री में मदद की।
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