रेवाड़ी। हरियाली अमावस्या बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्यग्रहण का योग बन रहा है लेकिन यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।
ज्योतिषाचार्य डॉ. अजय शास्त्री ने बताया कि सनातन धर्म में हरियाली अमावस्या को पुण्यदायी और आध्यात्मिक पर्व माना गया है। भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। धार्मिक अनुष्ठान, पूजन, दान और अन्य मांगलिक कार्य सामान्य रूप से किए जा सकेंगे।
श्रावण मास की अमावस्या को शिव साधना, पितृ तर्पण और प्रकृति संरक्षण के संगम के रूप में देखा जाता है। इस दिन व्रत, दान और पौधरोपण करने का विशेष महत्व बताया गया है।
श्रद्धालु स्नान-ध्यान के बाद शिवलिंग पर जल, दूध, गंगाजल, शहद और पंचामृत से अभिषेक कर सकते हैं। इसके बाद बेलपत्र, शमीपत्र, धतूरा, आक के पुष्प और भस्म अर्पित करने की परंपरा है। महामृत्युंजय मंत्र और ॐ नमः शिवाय का जाप भी किया जाता है।
अमावस्या तिथि को पितरों की तृप्ति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रद्धालु दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तिल, कुश और जल से पितरों का तर्पण कर सकते हैं।
जरूरतमंदों को भोजन कराने के साथ अन्न, वस्त्र और तिल का दान करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि इससे पितरों का आशीर्वाद मिलता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
हरियाली अमावस्या पर पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपण का भी विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन पीपल, नीम, तुलसी, बेल, आंवला, बरगद सहित फलदार और छायादार पौधे लगाने की परंपरा है।