संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। धारूहेड़ा से सटे भिवाड़ी में अलकायदा के 6 संदिग्ध सदस्यों के पकड़े जाने के बाद क्षेत्र के लोगों में डर का माहौल है। संदिग्धों का कमरा देने के पहले पुलिस सत्यापन नहीं नहीं किया गया था। अलकायदा के सदस्यों ने मकान मालिक को पांच सौ रुपये अग्रिम भुगतान कर कमरे की बुकिंग कराई थी। कहा था कि वे जल्द परिवार लेकर आएंगे।
संदिग्धों ने जहां कमरा लिया था वहां मुख्य गेट पर परचून की दुकान है जो यहां केयर टेकर भी है। केयरटेकर ने बताया कि 10 अगस्त को 2 लोग आए और दो कमरे किराये पर देने की बात कही। बताया कि परिवार के साथ रहना है। कॉलोनी की दूसरी मंजिल पर कमरों की फिनिशिंग चल रही थी। ऐसे में 4 दिन में काम पूरा होने पर कमरा देने की बात कही। इस पर दोनों संदिग्ध 500 रुपये देकर कमरे की बुकिंग करा दी और मोबाइल नंबर लिखवा दिया। 13 अगस्त को केयरटेकर ने सूचना दी। 17 या 18 अगस्त को दोनों युवक गए और एक कमरे का 3 हजार रुपये एडवांस किराया दिया। कहा परिवार लेकर आएंगे तो आधार कार्ड देंगे। उन्हें दूसरी मंजिल पर 83 और 84 नंबर का कमरा लिया था। केयरटेकर ने बताया कि दोनों युवक कब सामान रख गए, पता नहीं चला। 22 अगस्त को पुलिस आई तो असलियत पता चला।
22 अगस्त को अब्दुल्ला मार्केट के समीप की थी रेड
दिल्ली पुलिस की विशेष सेल ने 22 अगस्त को अब्दुल्ला मार्केट के समीप एक बहुमंजिला इमारत में भी रेड की थी। यहां दो कमरों में संदिग्धों के छिपने की सूचना थी। टीम ने ताला तोड़ कमरों के भीतर से कुछ सामान जब्त किया था। इमारत के छोटे-छोटे करीब 100 कमरों में फैक्ट्रियों के श्रमिक रहते हैं। चौपानकी के अब्दुल्ला मार्केट इलाके में 50 से लेकर 150 कमरों की इमारतें हैं, जिन्हें लेबर कॉलोनी कहा जाता है। इनमें मजदूर रहते हैं। यहां एक कमरा 2 से 3 हजार रुपये में मिल जाता है। कंपनियों का कामकाजी समय अलग-अलग होता है, इसलिए 24 घंटे आवाजाही रहती है। श्रमिक एक-दूसरे से परिचित नहीं हो पाते है। श्रमिकों का पुलिस सत्यापन नहीं किया जाता है। इन्हीं वजहों से संदिग्धों ने आरिफ कॉलोनी को रहने के लिए चुना।