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भारतेंदु युग के सेनापति थे गुप्त : डॉ. त्रिखा

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रेवाड़ी। जिले के गांव गुड़ियानी में जन्मे साहित्यकार एवं पत्रकार बाबू बालमुकुंद गुप्त की 115वीं पुण्यतिथि पर मॉडल टाउन स्थित हिंदू स्कूल में बाबू बालमुकुंद गुप्त स्मृति समारोह का आयोजन किया गया। इसमें प्रदेशभर के साहित्यकारों ने भाग लिया।
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हरियाणा साहित्य अकादमी, पंचकूला और बाबू बालमुकुंद गुप्त पत्रकारिता एवं साहित्य संरक्षण परिषद्, रेवाड़ी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में कोसली के विधायक लक्ष्मण सिंह यादव मुख्य अतिथि रहे। अकादमी के निदेशक और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. चंद्र त्रिखा ने अध्यक्षता की। समारोह में गुप्त के प्रपौत्र बिमल गुप्त (कोलकाता) ने स्वागताध्यक्ष की भूमिका निभाई। अधिवक्ता रणजीत सिंह यादव समारोह संयोजक रहे। समारोह में बाबू बालमुकुंद गुप्त पुरस्कार, अकादमी पुस्तक पुरस्कार, विचार गोष्ठी, नाट्य मंचन तथा हिंदी सेवी पुरस्कार आकर्षण के केंद्र रहे।
मुख्य अतिथि लक्ष्मण यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार गुड़ियानी को साहित्यिक तीर्थ के रूप में विकसित करेगी। वहां स्थित गुप्त की पैतृक हवेली में ई-लाइब्रेरी, संग्रहालय, पुस्तकालय व स्मारक बनाया जाएगा। अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. त्रिखा ने गुप्त के बहुआयामी व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें भारतेंदु युग का सेनापति और हिंदी भाषा का उन्नायक बताया। बिमल गुप्त ने कहा कि वे इस पैतृक हवेली को स्मारक, संग्रहालय, वाचनालय व ई-लाइब्रेरी बनाने के लिए प्रदेश सरकार को देने का प्रस्ताव दे चुके हैं। समारोह संयोजक रणजीत सिंह के अभिनंदन व परिषद् संरक्षक नरेश चौहान राष्ट्रपूत द्वारा परिषद् की रजत जयंती वर्ष के संदर्भ में साहित्यिक प्रतिबद्धता दोहराई गई। परिषद अध्यक्ष ऋषि सिंहल ने भावी परियोजनाओं पर प्रकाश डाला। प्रथम सत्र में आयोजित विचार गोष्ठी में सोनीपत से पधारे प्रख्यात साहित्यकार डॉ. संतराम देशवाल, प्रो. रमेशचंद्र शर्मा, विपिन सुनेजा तथा डॉ. प्रवीण खुराना ने गुप्त जी के साहित्य, भाषा व पत्रकारिता में योगदान को रेखांकित करते हुए उनका भावपूर्ण स्मरण किया।
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इस अवसर पर नव प्रकाशित कृतियों का विमोचन भी किया गया। जिनमें साहित्यकार, विपिन सुनेजा के नाटक संग्रह पर्दा उठने दो, डॉ. जयभगवान शर्मा का हरियाणवी लघु कविता संग्रह जवारे आली, सत्यवीर नाहड़िया के कुंडलिनी संग्रह हरियाणा के रंग, समशेर कोसलिया का निबंध संग्रह बरगद, विजयपाल सेहलंगिया का निबंध संग्रह विद्यालय में दिवस और जयंतियां व मनोज कौशिक करनावास का काव्य संग्रह गीत सुहाने गाता चल शामिल रहे।
समारोह में वरिष्ठ रचनाकार विपिन सुनेजा द्वारा गुप्तजी पर लिखित एवं निर्देशित नाटक ‘बाबूजी से भेंट’ रहा। जिसमें वरिष्ठ रंगकर्मी ऋषि सिंहल, पुनीत कुमार, रजत व योगेश कौशिक ने जीवंत अभिनय से भावविभोर कर दिया। परिषद के नए आजीवन सदस्यों सावित्री यादव, बुद्धदेव यादव, विनीत सिंह तंवर, राजीव गुप्ता, अजय यादव, रणजीत सिंह एडवोकेट ,संदीप यादव, लाल बहादुर कौशिक, प्रो. महावीर सिंह, नरेश यादव एडवोकेट, सुनील राव एडवोकेट को अलंकृत किया गया।
साहित्यकार सत्यवीर नाहड़िया की देखरेख में आयोजित समारोह में परिषद की ओर से वरिष्ठ साहित्यकार एवं उपाध्यक्ष रोहित यादव अटेली, श्यामबाबू गुप्त, गोपाल वशिष्ठ, श्रुति शर्मा, मुकुट अग्रवाल, डॉ कविता गुप्ता, आचार्य रामतीर्थ, महेश शर्मा, हर्ष कुमार, जुगल किशोर रूस्तगी, ओमशंकर नीरज कुमार, ने विभिन्न प्रभार संभाले।
उधर, गुड़ियानी स्थित गुप्त जी की पैतृक हवेली में परिषद उपाध्यक्ष कृष्ण भगवान गोयल की अध्यक्षता में हवन-यज्ञ के माध्यम से उनका स्मरण किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ रचनाकार डॉ. उमाशंकर यादव, प्रो. रमेश सिद्धार्थ, श्रीनिवास शर्मा शास्त्री, मनोज गोयल, दर्शना शर्मा, विजय भाटोटिया, रौनक हरियाणवी, अक्षय गुप्ता एडवोकेट, सुहेल गुप्ता आदि उपस्थित रहे। आयोजन समिति की ओर से हेमंत सिंहल ने सभी आगंतुकों का आभार ज्ञापित किया।
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इन साहित्यकारों को मिला सम्मान
समारोह में चार साहित्यकारों को परिषद की ओर से बाबू बालमुकुंद गुप्त पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया। इनमें गुरुग्राम की रचनाकार डॉ. कृष्णलता यादव, सोनीपत की डॉ. कमलेश मलिक, झज्जर के डॉ जयभगवान शर्मा तथा रेवाड़ी के दलबीर ‘फूल’ शामिल रहे। अकादमी की ओर से पुस्तक पुरस्कार प्रदान किए गए। जिनमें डॉ. जयभगवान शर्मा, झज्जर, डॉ. मनमोहन शर्मा, रोहतक, कविराज जेआरजे यादव, दिल्ली, डॉ. कमलेश मलिक सोनीपत, डॉ कृष्णलता यादव, गुरुग्राम डॉ.राजकला देशवाल, डॉ सतपाल सिंह सोनीपत, डॉ अशोक कुमार ‘मंगलेश’ चरखी दादरी, सत्यवीर नाहड़िया, नाहड़, रेवाड़ी, आशा यादव, कनीना, महेंद्रगढ़, समशेर कोसलिया, स्याणा, महेंद्रगढ़, डॉ. इंदु गुप्ता फरीदाबाद के नाम हैं।
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