रेवाड़ी। दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। ऐसे में अधिकतर जिलों में ग्रेडेड एक्शन रिस्पांस प्लान यानी ग्रैप लागू हो चुका है। प्रदूषण बोर्ड निकायों को पत्र लिखकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है और निकाय अधिकारी प्रदूषण की समस्या के निदान करवाने में गंभीर नहीं हैं। रेवाड़ी में नगर परिषद की लापरवाही के कारण पूरा शहर कचरे के ढेर पर बसा है। जिले की हर सड़क के किनारे कचरे के ढेर लगे हुए हैं। कचरा उठाने के बजाय इनको आग के हवाले किया जा रहा है, जिससे वातावरण प्रदूषित हो रहा है और हानिकारक गैस वातावरण में फैल रही है। वहीं औद्योगिक क्षेत्रों में चिमनियां धुआं उगल रही हैं, इससे प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।
रात को बढ़ रहा प्रदूषण का स्तर
एयर क्वालिटी के आंकड़ों को देखा जाए तो रात 12 बजे के बाद पीएम 2.5 सर्वाधिक 312 के आंकड़े को छू रहा है, जबकि पीएम-10 229 पहुंच रहा है। यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर और बढ़ जाएगा। शहर और आसपास के क्षेत्रों में धड़ल्ले से बिना पंजीकरण कराए कंस्ट्रक्शन का कार्य चल रहा है। यहां ग्रैप के पहले चरण के नियम लागू नहीं हो रहे। नगर परिषद और शहरी विकास प्राधिकरण के पास एक भी साइट का पंजीकरण नहीं है, जबकि अधिकतर साइट 500 गज से ऊपर की है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग के पास केवल उन साइट का जिम्मा है, जिनका क्षेत्र 20 हजार स्क्वॉयर फीट से ऊपर है। अन्य साइट की निगरानी नगर परिषद और शहरी विकास प्राधिकरण को करनी है।
प्रदूषण स्तर का यूं होता है नुकसान
वायु गुणवत्ता सूचकांक की बात करें तो इसमें यह पता लगता है कि वायु में प्रदूषण का स्तर कितना है। इसमें भी विभिन्न प्रकार की श्रेणियां बनाई गई हैं, जिस श्रेणी को स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छा माना जाता है उसमें यह सूचकांक 0 से 50 तक होना चाहिए जबकि संतोषजनक श्रेणी में यह सूचकांक 51 से 100 के बीच माना गया है। 101 से 200 तक चिंताजनक कहा जा सकता है। इसी प्रकार 200 से 300 के बीच वायु में सूचकांक का होना नुकसानदायक माना जाता है, जबकि 301 से 400 तक खतरनाक व 401 से ऊपर के स्तर को अत्यंत घातक की श्रेणी में रखा गया है। चिकित्सकों के अनुसार 200 से ऊपर वायु प्रदूषण का स्तर बच्चों व बुजुर्गों के साथ-साथ हृदय व श्वास रोगियों के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है।
हमारी ओर से पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। निकायों को प्रदूषण बोर्ड के चेयरमैन प्रदूषण की रोकथाम को लेकर कदम उठाने के आदेश दे चुके हैं। मैं खुद रिमाइंडर करा रहा हूं। उम्मीद है कि नगर परिषद और शहरी निकाय प्राधिकरण बिना पंजीकरण की साइटों पर जाकर चैक करेंगे।
-हरीश शर्मा, क्षेत्रीय अधिकारी, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड