रेवाड़ी। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने और एयर क्वालिटी इंडेक्स खराब श्रेणी में पहुंचने के बाद ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान का पहला चरण लागू किया गया है। इसके तहत तंदूर, निर्माण कार्यों, प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाई गई है।
होटल, रेस्तरां और खुले ढाबों में कोयले व लकड़ी का इस्तेमाल प्रतिबंधित रहेगा। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को एलपीजी, बिजली और अन्य स्वच्छ ईंधन का उपयोग करना होगा। बिजली आपूर्ति के लिए डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर भी रोक रहेगी, हालांकि आपातकालीन स्थिति में इसकी अनुमति होगी।
निर्माण और तोड़फोड़ के दौरान उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए जरूरी उपाय करने होंगे। रेत, बजरी और सीमेंट जैसी निर्माण सामग्री को खुले में रखने पर रोक रहेगी। इनकी ढुलाई ढके हुए वाहनों में करनी होगी। सड़कों की मैकेनिकल सफाई, पानी का छिड़काव और एंटी-स्मॉग गन के इस्तेमाल पर जोर दिया जाएगा।
कूड़ा जलाने और वाहनों की जांच पर जोर:
खुले में कूड़ा फेंकने, सूखी पत्तियां और प्लास्टिक जलाने पर प्रतिबंध रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जा सकता है। अधिक धुआं छोड़ने वाले पुराने वाहनों और वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र के बिना चलने वाले वाहनों के खिलाफ जांच अभियान चलाया जाएगा। बिना वैध पीयूसी वाले वाहनों को ईंधन नहीं देने का भी प्रावधान बताया गया है।