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सरकारी खरीद बंद, 200 से 300 रुपये के घाटे में किसान बेच रहा है बाजरा

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जिले में सरकार ने बाजरे की खरीद अचानक बंद कर दी है। किसानों को अब बाजरा सस्ते भाव में आढ़तियों को देना पड़ेगा। भावांतर योजना के तहत प्रति क्विंटल 450 रुपये देने के बाद भी किसानों को कम से कम सरकारी भाव से 200 से 300 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ेगा। सरकार द्वारा कुछ पंजीकृत किसानों का बाजरा 2350 रुपये खरीदा गया है। अब बाकी बचे किसानों का बाजरा सरकार ने लेने से मना कर दिया है। अब ये किसान आढ़तियों को 1600 से 1700 रुपये के भाव में देने को मजबूर हो रहे है।
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जिले में कुल 50656 किसानों ने फसल बीमा पोर्टल सरकारी बोली पर बाजरा बेचने के लिए पंजीकरण करवाया था। वहीं 212574 एकड़ में बाजरे फसल की बिजाई की गई थी। इसमें केवल करीब साढ़े चार हजार पंजीकृत किसान ही अपना बाजरा बेच पाए है। बाकी बचे अब किसी भी आढ़ती को अपना बाजरा बेच सकते हैं।
जिले के कुछ पंजीकृत किसानों का ही हैफेड ने खरीदा बाजरा
जिले में हैफेड ने 2 अक्तूबर से 7 अक्तूबर तक रेवाड़ी के पंजीकृत 1792 व कोसली के करीब 2800 किसानों का बाजरा सरकारी भाव पर खरीदा है। अब किसान आढ़तियों को 1600 से 1710 तक रुपये तक के भाव में बाजरा बेचने को मजबूर हो रहे है। हैफेड ने रेवाड़ी में कुल 30 हजार क्विंटल और कोसली में 55 हजार क्विंटल बाजरा खरीदा है। उसके बाद सरकार द्वारा खरीद बंद कर दी गई है।
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सरकार ने अचानक सरकारी खरीद बंद करने से काफी परेशानी हो रही है। अब हमें अपना बाजरा प्राइवेट दुकानदारों को सस्ते भाव में देने को मजबूर होना पड़ रहा है।
-रामजस, किसान, चिमनावास।
सरकारी भाव पर बाजरा नहीं बिकने से हमें प्राइवेट बोली पर देना पड़ रहा है। आढ़ती सस्ते दामों में बाजरा खरीद रहे हैं। भावांतर योजना का फायदा मिलने के बाद भी घाटे का सौदा हो रहा है।
-भोलाराम, किसान, चिमनावास।
किसानों को कहीं भी बाजरा बेचने की छूट
सकार ने भावांतर योजना लागू कर दी है। ऐसे में किसानों को प्रति क्विंटल 450 रुपये मिल जाएंगे। इसलिए सरकार ने बाजरा खरीद बंद कर दी है। उन्होंने बताया कि जिन किसानों ने अपना रजिस्ट्रेशन करवा रखा है उन किसानों को पैसे मिल जाएंगे। उन्होंने बताया कि भावांतर योजना लागू होने के बाद किसानों को कहीं भी अपनी फसल बेचने की छूट है। ऐसे में किसान कहीं पर भी अपनी फसल भेज सकते हैं।
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- मनोज कुमार, हैफेड, मैनेजर।
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