रेवाड़ी। सरकारी खरीद व्यवस्था को सुचारू बनाने के उद्देश्य से सरसों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद गांववार जारी शेड्यूल के अनुसार की सोमवार से होगी। शेड्यूल के मुताबिक, 30 मार्च को लिसाना, बुढ़पुर, गज्जीवास, कमालपुर, आसपुर, रामगढ़ सहित कई गांवों के किसान मंडी में अपनी फसल लेकर आएंगे।
31 मार्च को डोहकी, नयागांव, गिन्दोखर, हरजीपुर, नंगली गोधा, मालपुरा, डुमावास आदि गांवों का नंबर रहेगा। एक अप्रैल को आकेड़ा, खरखड़ा, खडगवास, बालावास अहीर, मुण्डलिया, पीवरा, झांझनवास सहित अन्य गांव शामिल हैं।
दो और तीन अप्रैल को पहले वाले गांवों का दोबारा शेड्यूल रहेगा जबकि चार अप्रैल को छूटे हुए किसान अपनी सरसों बेच सकेंगे। पांच अप्रैल को मंडी अवकाश रहेगा।
किसानों को सलाह, मंडी में सूखी फसल ही लेकर आएं
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना शेड्यूल के मंडी में आने वाले किसानों की सरसों की खरीद नहीं की जाएगी। उन्हें अगले सप्ताह के शेड्यूल का इंतजार करना होगा। किसानों को सलाह दी गई है कि वे मंडी में सूखी फसल ही लेकर आएं और जिस वाहन से फसल लाएं उस पर नंबर होना अनिवार्य है। इसके अलावा मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण का दस्तावेज, आधार कार्ड और पंजीकृत मोबाइल नंबर साथ लाना जरूरी होगा ताकि गेट पास और बायोमेट्रिक सत्यापन में समस्या न हो। दूसरी तरफ किसानों को प्राइवेट में सरसों के 6800 प्रति क्विंटल दाम मिल रहे हैं। एमएसपी पर नहीं बेच रहे हैं।
बायोमेट्रिक सत्यापन होना अनिवार्य
डीसी अभिषेक मीणा ने मार्केट कमेटी सचिव को निर्देश दिए हैं कि फसल खरीद के समय बायोमेट्रिक सत्यापन होना अनिवार्य है। इसके लिए सभी प्रबंध रखें। उन्होंने कहा कि किसान स्वयं या उनकी ओर से नॉमिनेट व्यक्ति द्वारा फसल बेच सकता है जिसकी डिवाइस से बायोमेट्रिक सत्यापन की जाएगी। मंडी में प्रवेश द्वार पर फसल लाने वाले वाहन की फोटो ली जानी आवश्यक है। खरीद प्रक्रिया के दौरान गेट पास जारी करने, फसल तुलाई और भुगतान से जुड़ी प्रत्येक प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित होनी चाहिए।
लापरवाही नहीं की जाएगी बर्दाश्त
डीसी ने कहा है कि मंडियों में साफ-सफाई, पीने का पानी, शौचालय, बैठने की व्यवस्था सहित सभी मूलभूत सुविधाएं की जाएं जिससे किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने अधिकारियों को सचेत करते हुए कहा कि खरीद प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि कोई समस्या आती है तो उसका त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए और आवश्यकतानुसार वैकल्पिक व्यवस्थाएं तुरंत लागू की जाएं। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य किसानों की फसल की निर्बाध खरीद और उन्हें समय पर भुगतान करना है।