रेवाड़ी। मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में वाणिज्य विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में सिविल सेवा परीक्षा में देश स्तर पर तृतीय स्थान पाने वाले एकांश ढुल ने विद्यार्थियों को अपनी सफलता की कहानी बताई। उन्होंने कहा कि मेहनत और अनुशासन से लक्ष्य की प्राप्ति होती है।
पंचकूला निवासी आईएएस अधिकारी एकांश ढुल ने कहा कि सफलता किसी एक दिन के प्रयास से नहीं मिलती बल्कि इसके पीछे निरंतर मेहनत, अनुशासन और सही दिशा में की गई तैयारी होती है।
उन्होंने बताया कि उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से बीकॉम (ऑनर्स) की शिक्षा प्राप्त करने के बाद योजनाबद्ध तरीके से यूपीएससी परीक्षा की तैयारी की और देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शामिल सिविल सेवा परीक्षा में तीसरा स्थान हासिल किया।
उन्होंने बीकॉम, एमकॉम और एमबीए के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि असफलताओं से निराश होने की बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्पष्ट लक्ष्य, मजबूत इच्छाशक्ति और लगातार प्रयास से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
सत्र के दौरान एकांश ढुल ने विद्यार्थियों को उत्तर लेखन की तकनीक, समय प्रबंधन, विषय चयन, अध्ययन की योजना और मानसिक मजबूती बनाए रखने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक सुझाव दिए। उनके अनुभवों और विचारों से विद्यार्थियों में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार हुआ।
कार्यक्रम में उनके पिता कृष्ण कुमार ढुल भी उपस्थित रहे। उन्होंने भी विद्यार्थियों को कड़ी मेहनत करने और अपने उद्देश्य के प्रति समर्पित रहने के लिए प्रेरित किया।
कुलसचिव प्रोफेसर दिलबाग सिंह ने आईएएस एकांश ढुल और उनके पिता कृष्ण कुमार ढुल का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया। उन्होंने एकांश ढुल की उपलब्धि को हरियाणा और देश के युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया।
इस अवसर पर परीक्षा नियंत्रक डॉ. विपुल यादव, प्रोफेसर तेज सिंह, प्रोफेसर अदिति शर्मा, प्रोफेसर संजय हुड्डा, प्रोफेसर दीपक गुप्ता, इंजीनियरिंग शाखा के एक्सईएन नवीन कुमार और सुरेंद्र सिंह मौजूद रहे।
वाणिज्य विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रविंद्र ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए मुख्य अतिथि, विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकगण और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने आयोजन समिति के सदस्यों प्रो. अदिति शर्मा, प्रो. दीपक गुप्ता, डॉ. ईश्वर शर्मा, डॉ. संदीप पुरवा और डॉ. सुनीता यादव के योगदान की सराहना की।