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मंत्रोच्चार और शंखनाद के साथ गीता महोत्सव का आगाज

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Geeta Mahotsav - फोटो : Rewari
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तीन दिवसीय श्रीमद्भागवत गीता महोत्सव शुक्रवार को हवन यज्ञ व शंखनाद के साथ शुरू हुुआ। इस दौरान वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि कर्म के उपदेश को एक बार फिर से जागृत कराने के लिए सरकार की ओर से हर वर्ष गीता महोत्सव मनाया जाता है। विश्व में गीता एक ऐसा ग्रंथ है जो धर्म-पंथ से ऊपर उठकर है। इस मौके पर एडीजी आरसी मिश्र ने आधे घंटे से ज्यादा गीता के महत्व पर प्रकाश डाला।
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समारोह का शुभारंभ करते हुए मुख्यातिथि सहकारिता मंत्री डॉ. बनवारी लाल ने गीता महात्मय पर प्रकाश डाला। समारोह में शिक्षक वर्ग संगोष्ठी, सांस्कृतिक कार्यक्रम व लाइट एंड साउंड शो भी हुए।
धर्म को सामने रख करें कर्म: सहकारिता मंत्री
सहकारिता मंत्री डॉ. बनवारी लाल ने अपने संबोधन में कहा कफि गीता से बडा काई ग्रंथ नही है। गीता सार्वभौमिक है, बिना जात-पांत के भेद बगैर गीता सबके लिए उपयोगी है। लोगों में कर्म बोध हो सके इसको देखते हुए ही सरकार की ओर से प्रत्येक वर्ष गीता उत्सव मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि सभी लोग गीता को सामने रखकर कर्म करेंगे तो उसके परिणाम भी बेहतर होंगे।
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गीता को अंतर्राष्ट्रीय ग्रंथ का दर्जा देने की मांग
एडीजीपी आरसी मिश्रा ने कहा कि जीओ गीता के संस्थापक गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज की ओर से सरकार के साथ मिलकर लगातार गीता को अंतर्राष्ट्रीय ग्रंथ का दर्जा दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि गीता में 700 श्लोक हैं। प्रत्येक श्लोक में विश्व कल्याण की बात कही गई है। यूनाइटेड नेशन ऑफ आर्गेनाइजेशन ( यूएनओ) की बुकी प्रस्तावना में 280 ऑब्जेक्टिव श्रीमद् भागवत गीता से लिए गए हैं।
युवा से लेकर बुजुर्ग तक के लिए गीता का महत्व
भागवत गीता में ज्ञान योग, कर्मयोग व राजयोग के बारे में विस्तार से समझाया गया है। उन्होंने बताया कि युवा से बुजुर्ग के लिए गीता का महत्व है। उन्होंने बताया कि गीता में क्रोध को विनाश का कारण बताया गया है। इसके अलाव वाणी से निकले बोल से पूरा जीवन बदल जाता है।

Geeta Mahotsav- फोटो : Rewari

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