रेवाड़ी। गणेश प्रतिमा को विसर्जन के लिए कंधों पर ले जाते श्रद्धालु
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शहर में गणेश चतुर्थी महोत्सव का वीरवार को समापन हो गया। इस मौके पर भगवान गणेश की मूर्तियों का प्रशासन के निर्धारित किए गए सोलहराही तालाब में विसर्जन किया गया। श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और भक्ति के साथ गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ आदि के जयकारे लगाए। वहीं नहर में मूर्ति विसर्जन को लेकर प्रशासन की सख्ती के चलते पुलिस और श्रद्धालुओं के बीच नोकझोंक भी हुई।
गणेश चतुर्थी के महोत्सव के समापन अवसर पर वीरवार सुबह से ही श्रद्धालुओं ने मूर्ति विसर्जन की तैयारी कर ली थी। जिला प्रशासन द्वारा मूर्तियों का विसर्जन नहरों में नहीं करने की चेतावनी दे दी थी, इसलिए कुछ श्रद्धालुओं ने मौके की नजाकत को देखते हुए सुबह ही तुर्कियावास रोड व दिल्ली रोड पर स्थित नहर में मूर्ति का विसर्जन कर दिया था। प्रशासन को यह जानकारी मिली, नहरों पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। श्रद्धालु बैंडबाजों की धुन पर गुलाल-अबीर खेलते हुए मूर्ति विसर्जन के लिए नहर पर पहुंचे, जहां पुलिस ने उन्हें रोक दिया। श्रद्धालुओं ने नहर पर भंडारा की भी व्यवस्था की थी। तुर्कियावास रोड पर स्थित नहर के समीप ही प्रशासन की तरफ से एक बड़ा गड्डा खुदवाकर उसमें पानी भरवाया गया, जहां लोगों ने मूर्ति विसर्जन किया। हालांकि श्रद्धालुओं ने नहर में ही मूर्ति विसर्जन करने का काफी प्रयास किया, लेकिन पुलिस की मौजूदगी उनकी आस्था के बीच आ गई। श्रद्धालु शहर के सरकूलर रोड होते हुए सेक्टर-1 स्थित सोलहराही पहुंचे तथा वहां तालाब में मूर्ति को विसर्जित किया। रास्ते में श्रद्धालुओं ने गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ के गगनभेदी श्लोक से वातावरण को गुंजायमान किया। श्रद्धालुओं में भारी संख्या में महिलाएं व बच्चे भी शामिल थे। दस दिवसीय महोत्सव को मनाने को लेकर लोगों में भारी जोश देखा गया। शहर भर में 100 से अधिक जगह पर श्रद्धालुओं ने मूर्ति विराजमान की थी। इस दौरान लोगों ने जागरण व भंडारे भी किए। इन दिनों के दौरान शहर में धार्मिक उत्सव की लगभग धूम रही। नहर में मूर्ति विसर्जन पर बैन पिछले कई सालों से श्रद्धालु गणेश की प्रतिमा को नहरों में विसर्जित करते आ रहे थे। हर बार नहरों में गंदगी काफी बढ़ जाती थी। मूर्ति विसर्जन करते समय हादसे भी हुए हैं। पानी भी गंदा हो जाता था, जिसे साफ करने में जनस्वास्थ्य विभाग को अतिरिक्त मेहनत व खर्चा करना पड़ता था। इन सभी पहलुओं को देखते हुए इस बार प्रशासन ने नहरों में मूर्ति के विसर्जन पर रोक लगा दी थी।