रेवाड़ी। शहर में ठंड के मौसम में भी लोगों को जलसंकट से जूझना पड़ रहा है। जवाहरलाल नेहरू (जेएलएन) फीडर में पानी का बहाव रुक गया है। नहर में 24 दिन के लंबे क्लोजर के चलते जनस्वास्थ्य विभाग ने 28 दिसंबर से शहर में एक दिन छोड़कर एक दिन पेयजल आपूर्ति करने का निर्णय लिया है।
नहर में पानी बंद रहने की अवधि तक वैकल्पिक दिन ही जलापूर्ति की जाएगी, ताकि उपलब्ध स्टोरेज से स्थिति को संभाला जा सके। चिंता की बात यह है कि संकट की शुरूआत अभी हुई है, जबकि गर्मियों का मौसम आना अभी बाकी है। आमतौर पर सर्दियों में पानी की मांग कम रहती है, इसके बावजूद इस समय पेयजल आपूर्ति व्यवस्था चरमराई हुई है।
हाल ही में विधानसभा सत्र के दौरान रेवाड़ी विधायक लक्ष्मण सिंह यादव भी शहर में पानी की कमी का मुद्दा जोर-शोर से उठा चुके हैं। क्लोजर के आखिरी एक सप्ताह में शहरवासियों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यदि किसी कारणवश नहर बंद रहने की अवधि एक सप्ताह भी बढ़ गई, तो स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो सकती है।
सोनीपत के खूबडू हेड से पानी छोड़ने का शेड्यूल इस बार बदल दिया गया है। पहले 14-14 दिन के ग्रुप में पानी छोड़ा जाता था, लेकिन अब इसे पांच ग्रुप में बांट दिया गया है। इसके चलते नहर में 24 दिन पानी बंद और केवल 14 दिन पानी चलने की व्यवस्था लागू हुई है। सीमित स्टोरेज क्षमता के कारण इसका सीधा असर शहर की जलापूर्ति पर पड़ रहा है।
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टैंकों की सीमित क्षमता बनी बड़ी बाधा:
शहर की तेजी से बढ़ती आबादी के मुकाबले वाटर टैंकों की संख्या और क्षमता में बीते एक दशक से कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है। केवल लिसाना जलघर में एक नया टैंक बनाया गया है, जिससे वहां अब तीन टैंक हो गए हैं। लिसाना जलघर से शहर के करीब 30 फीसदी हिस्से को पानी सप्लाई होती है। वहीं, शहर का लगभग 70 फीसदी क्षेत्र कालाका जलघर पर निर्भर है, जहां फिलहाल सिर्फ पांच वाटर टैंक मौजूद हैं। तकनीकी रूप से इन टैंकों में अधिकतम 15 से 20 दिन तक का ही पानी संग्रह किया जा सकता है, जबकि मौजूदा क्लोजर 24 दिन का है।
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वर्जन:
28 दिसंबर से शहर में एक दिन छोड़कर एक दिन पेयजल आपूर्ति होगी। नहर में पानी बंद रहने की अवधि तक वैकल्पिक दिन ही जलापूर्ति की जाएगी, ताकि उपलब्ध स्टोरेज से स्थिति को संभाला जा सके।-हेमंत कुमार, जेई, जनस्वास्थ्य विभाग