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अब स्कूल में ही मिलेगी निशुल्क कोचिंग

Mon, 02 Nov 2015 12:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला रेवाड़ी
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रेवाड़ी। शिक्षा विभाग ने अब विज्ञान विषय से बारहवीं कर रहे विद्याॢथयों के लिए मेडिकल और इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा की कोचिंग शुरू करने की योजना तैयार की है। इसके लिए विभाग ने कवायद शुरू कर दी है और सभी सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपलों से योजना के संबंध में सुझाव मांगे हैं। योजना पर सभी की राय मिलने के बाद कोचिंग शुरू करने का निर्णय लिया जाएगा। इसके लिए विभाग की ओर से विषय के विशेषज्ञ शिक्षकों का चयन किया जाएगा, जो विद्याॢथयों को प्रवेश परीक्षा के संबंध में मार्गदर्शन देंगे। विभाग के मुताबिक ये कोचिंग संभवत तीन माह की हो सकती है।
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जानकारी के अनुसार विज्ञान की पढ़ाई कर रहे लगभग सभी विद्यार्थियों का सपना डॉक्टर या इंजीनियर बनने का होता है, लेकिन प्राइवेट कोचिंग की अधिक फीस और विशेषज्ञ अध्यापकों की कमी के चलते ऐसे छात्रों का सपना बीच में ही दम तोड़ देता है। अब जिला शिक्षा विभाग मेडिकल और इंजीनियरिंग में प्रवेश लेने वाले सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले बारहवीं के विद्याॢथयों के लिए कोचिंग की व्यवस्था करने की योजना तैयार करने में जुटा है। इसी संदर्भ में सभी सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपलों से राय-मशवरा लिया जा रहा। यदि कवायद् हकीकत रूप लेती है तो तीन महीने तक स्कूलों में सब्जेक्ट वाइज अलग-अलग अध्यापकों से कोचिंग की व्यवस्था की जाएगी। डॉक्टर बनने के लिए  छात्र के पास बारहवीं कक्षा में बायलॉजी, भौतिक विज्ञान व रसायन विज्ञान होना जरूरी है, वहीं इंजीनियर बनने के लिए विद्यार्थी के पास बारहवीं में गणित, भौतिक व रसायन विज्ञान विषय का होना अनिवार्य है। जिले के सरकारी स्कूलों में ऐसे शिक्षकों की कमी नहीं हैं, जो इन विषयों की विशेषज्ञता न रखते हों। लेकिन जरूरत है एक पहल की।
निशुल्क होगी कोचिंग कक्षाएं
शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल की छुट्टी के बाद विशेषज्ञ अध्यापकों की ओर से निशुल्क कोचिंग बच्चों की संख्या के आधार पर दी जाएंगी। बच्चों का समय बर्बाद न हो,  इसको ध्यान में रखकर ही शिक्षा विभाग कक्षाओं के मंथन में जुटा हुआ है। फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ व बायलॉजी विषयों की कक्षाओं को किस तरह से समायोजित करना है। तीन महीने इसे किस तरह से रिजल्ट ओरिएंटेड बनाना है, योजना में पहला लक्ष्य यही रखा गया है।
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मार्गदर्शन के अभाव में डॉक्टर-इंजीनियर नहीं बन पाते
सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले छात्रों में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन प्राइवेट कोचिंग की अधिक फीस और उचित मार्गदर्शन न मिलने के कारण वे मेडिकल और इंजीनियरिंग की परीक्षा में प्रवेश लेने से वंचित रह जाते हैं। यदि सरकारी स्कूलों में छात्रों के लिए अच्छे मार्गदर्शन के साथ अच्छी कोचिंग की व्यवस्था की जाए तो सरकारी स्कूलों के इस भ्रम को तोड़ा जा सकता है। प्राइवेट स्कूलों के विद्यार्थियों की ओर से विद्याॢथयों के लिए कोचिंग की अतिरिक्त व्यवस्था की जाती है, इसलिए उनके परिणाम भी सकारात्मक आते हैं।
500 से ज्यादा विद्यार्थी बाहर करते हैं कोचिंग
जिले सरकारी गैर सरकारी १०० से अधिक स्कूलों से प्रतिवर्ष पांच सौ से लेकर छह सौ विद्यार्थी डॉक्टर व इंजीनियर बनने का सपना संजोए दिल्ली व कोटा सहित अनेक शहरों में कोचिंग के लिए जाते हैं। जहां उन्हें प्रतिवर्ष कोचिंग के लिए ७० हजार से लेकर एक लाख रुपये तक की फीस देनी पड़ती है। इसके अलावा रहने व खाने के लिए भी प्रत्येक विद्यार्थी को आठ से दस हजार रु पये तक खर्च मासिक करने पड़ते हैं। फीस देने के साथ ही पहली बार घर से बहार रहने पर विद्यार्थियों को मानसिक प्रताडऩा भी झेलनी पड़ती है।
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वर्जन
स्कूलों के प्रिंसिपलों को राय के लिए पत्र भेजा गया है। योजना के संबंध में सहमति बनने के बाद ही विद्यार्थियों के लिए कोचिंग की व्यवस्था की जाएगी। जो कि तीन माह तक चलेगी।
धर्मबीर बाल्डोदिया, जिला शिक्षा अधिकारी रेवाड़ी।
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वर्जन
सरकारी स्कूलों में प्रतिभा की कोई कमी नहींं है, जरूरी है, सही दिशा दिखाने की। शिक्षा विभाग का यह प्रयास उन विद्यार्थियों के लिए संजीवनी का काम करेगा,जो कि पैसे के अभाव से वंचित रह जाते हैं।
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पंकज सैनी, आईआईटी कोचिंग एक्सपर्ट
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