रेवाड़ी। जिले की मंडियों में 4 लाख क्विंटल बाजरा पहुंच चुका है लेकिन अब तक 60 प्रतिशत फसल का उठान हुआ है। इस बीच सरकार द्वारा बाजरा की खरीद प्रक्रिया आज से बंद कर दी गई है, जिससे किसानों के सामने नई स्थिति बन गई है। पिछली बार अभी तक 5.47 लाख क्विंटल सरसों की आवक हुई थी। अभी आवक हो रही है।
इस बार बाजरा उत्पादक किसानों को बाजार में अच्छे दाम मिलने के कारण उन्होंने बड़ी मात्रा में अपनी फसल निजी खरीदारों को बेची। किसानों के अनुसार निजी व्यापारियों ने बाजरा के दाम करीब 6900 रुपये प्रति क्विंटल तक दिए, जो सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लगभग 6200 रुपये प्रति क्विंटल से काफी अधिक है।
यही कारण रहा कि सरकारी खरीद केंद्रों पर अपेक्षाकृत कम किसान पहुंचे और अधिकांश ने खुले बाजार को प्राथमिकता दी। सरकारी खरीद में इस बार सीमित भागीदारी रही, जबकि निजी खरीद लगातार जारी रही और आगे भी जारी रहने की संभावना है। किसानों को बेहतर दाम मिलने से उन्हें आर्थिक रूप से लाभ हुआ है, जिससे उनकी लागत की भरपाई आसानी से हो सकी।
हालांकि, मंडियों में अभी भी बड़ी मात्रा में बाजरा का उठान बाकी है, जिससे भंडारण और प्रबंधन की चुनौती बनी हुई है। कुल मिलाकर, इस सीजन में बाजरा की अच्छी आवक और बेहतर बाजार भाव ने किसानों को राहत दी है, हालांकि उठान में देरी अब प्रशासन और किसानों दोनों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।