संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। किशोरावस्था शिक्षा कार्यक्रम के तहत शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षित होने के बाद शिक्षक विद्यार्थियों को हार्मोंस में बदलाव के बारे में बताएंगे। साथ ही स्वस्थ रहने के तरीके बताएंगे।
राजकीय विद्यालयों में कार्यरत मनोविज्ञान व जीव-जंतु विज्ञान विषय के शिक्षक कक्षा एक से 12वीं तक के विद्यार्थियों को हार्मोंस में बदलाव के बारे में जानकारी देंगे। इसका उद्देश्य किशोरों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास के साथ उन्हें सुरक्षित और स्वस्थ जीवन जीने के लिए जागरूक करना है। शिक्षा विभाग के मुताबिक, किशोरावस्था में विद्यार्थी का मन चंचल होता है। किशोरावस्था में विद्यार्थियों का ध्यान पढ़ाई की तरफ ना होकर अन्य अनावश्यक बातों की ओर चला जाता है। इस कारण विद्यार्थियों के बुरी संगति में पड़ने का डर रहता है। इसके लिए विशेष कक्षाएं भी लगाई जाएंगी।
कार्यक्रम का उद्देश्य किशोरों को व्यक्तिगत स्वास्थ्य और स्वच्छता के बारे में जानकारी देना है। किशोरों को आत्मविश्वास और आत्मसम्मान के विकास के लिए मार्गदर्शन देंगे। यह उन्हें मानसिक समस्याओं का सामना करने में मदद करेगा। किशोरों में आत्मनिर्भरता और उचित निर्णय लेने की क्षमता विकसित की जाएगी। किशोरों को शारीरिक सुंदरता, शोषण और दुर्व्यवहार से संबंधित मुद्दों के बारे में जागरूक किया जाएगा ताकि वे ऐसी स्थितियों से खुद को सुरक्षित रख सकें। उन्हें उचित जानकारी होने से वे शारीरिक, मानसिक और सामाजिक खतरों से बच सकते हैं, यह मूल उद्देश्य रहेगा।
वर्जन
शिक्षा निदेशालय की ओर से किशोरावस्था शिक्षा कार्यक्रम को लेकर आदेश जारी किए गए हैं। आदेश की प्रति स्कूलों को भेज दी गई है।-कपिल पूनिया, जिला शिक्षा अधिकारी रेवाड़ी।