रेवाड़ी। जिले में अग्निशमन विभाग में कुल 139 कर्मचारियों की आवश्यकता है लेकिन वर्तमान में सिर्फ 72 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। इनके ऊपर आग की घटनाओं पर काबू पाने की जिम्मेदारी है। इसके अलावा पर्याप्त संसाधन भी नहीं है। इसके बाद भी दमकलकर्मी लगातार निस्वार्थ भाव से सेवा दे रहे हैं।
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एक अग्निशमन गाड़ी को 24 घंटे सुचारू रूप से संचालित करने के लिए कम से कम 18 कर्मचारियों की जरूरत होती है, जिसमें 8-8 घंटे की तीन शिफ्ट शामिल हैं।
एक गाड़ी के लिए एक चालक, चार फायरमैन और एक लीड फायरमैन अनिवार्य होते हैं। इस मानक के अनुसार पूरे जिले में प्रभावी अग्निशमन व्यवस्था के लिए 139 कर्मचारियों की जरूरत है लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण यह व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
कर्मचारियों की कमी के चलते मौजूदा स्टाफ को 12-12 घंटे की लंबी ड्यूटी करनी पड़ रही है। लगातार ड्यूटी के कारण उन्हें पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता, जिससे कार्यक्षमता भी प्रभावित होने का खतरा बना रहता है।
फसल कटाई और त्योहारों के सीजन में दमकलकर्मियों की छुट्टियां भी रद्द कर दी जाती हैं, जिससे उनके व्यक्तिगत जीवन पर असर पड़ता है। केवल बारिश के सीजन में कर्मचारियों को कुछ राहत मिलती है।
हर साल होती हैं आग की घटनाएं : 2023 में जिले में गेहूं की फसल की कटाई के दौरान आग की 100 घटनाएं हुई थीं। 2024 में आग की 80 और 2025 में आग की 90 घटनाएं हुईं थीं। इस वर्ष अभी तक 12 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं।
फायर ब्रिगेड सिर्फ 15 गाड़ियां उपलब्ध
अग्निशमन विभाग में कुल 15 गाड़ियां उपलब्ध हैं। इनमें धारूहेड़ा में 2, कोसली में 2 और बावल में 2 गाड़ियां तैनात हैं। बाकी रेवाड़ी में हैं। जिले के विस्तार और बढ़ती आबादी को देखते हुए यह संख्या अपर्याप्त मानी जा रही है। कई बार एक साथ आग की घटनाएं अलग-अलग स्थानों पर हो जाती हैं, जिससे संसाधनों का दबाव और बढ़ जाता है। इससे पहले 18 गाड़ियां थी। 3 गाड़ियों का समय पूरा होने पर उन्हें नान एनसीआर क्षेत्र में भेजा गया है।
शहर के दोनों तरफ फायर स्टेशन जरूरी
रेवाड़ी में सिर्फ 1 फायर स्टेशन है। समय के साथ रेवाड़ी के क्षेत्रफल और जनसंख्या दोनों में वृद्धि हुई है। इससे आग लगने की घटनाओं में भी वृद्धि हुई है लेकिन संसाधन में बढ़ोतरी नहीं की गई। शहर में एक और फायर स्टेशन बनाने के लिए जमीन देखी जा रही है। फायर स्टेशन के निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया था।