रेवाड़ी। गुमीणा गांव निवासी शिक्षाविद दिनेश सोनी पिता हरपाल सिंह सोनी से मिले संस्कारों को आगे बढ़ा रहे हैं। बताते हैं कि पिता हमेशा शिक्षा को जीवन की सबसे बड़ी पूंजी मानते थे।
वे कहा करते थे पढ़-लिखकर केवल अपना नाम मत बनाओ बल्कि समाज का नाम भी रोशन करो। कलम की ताकत तलवार से बड़ी होती है। पिता के इन्हीं विचारों ने उनके जीवन की दिशा तय की। आज दिनेश सोनी राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पाली में कार्यरत हैं। वे विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित शिक्षा नहीं देते बल्कि ईमानदारी, अनुशासन, मेहनत और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे जीवन मूल्यों से भी परिचित कराते हैं।
उनका मानना है कि एक अच्छा शिक्षक वही होता है जो बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में योगदान दे। दिनेश सोनी ने बताया कि पिता का संघर्ष, त्याग और समाज के प्रति समर्पण उनके लिए प्रेरणा का स्रोत है। वे आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की मदद करने और निराश बच्चों में आत्मविश्वास जगाने का प्रयास करते हैं। उनका मानना है कि यदि वे अपने पिता के आदर्शों को अगली पीढ़ी तक पहुंचा पा रहे हैं, तो यही उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान है।