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कोरोना के चलते आंदोलन में शिफ्ट में आएंगे किसान

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रेवाड़ी। कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर पर किसानों का धरना 139 वें दिन भी जारी रहा। शनिवार को धरनास्थल पर किसान नेता डॉ. माधव ने कहा कि केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ छह महीने से ज्यादा समय से चल रहा किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। कोरोना को देखते हुए ही आंदोलन स्थल पर ज्यादा भीड़ नहीं करने का भी फैसला लिया गया है। इसलिए किसान शिफ्टों में आंदोलन में शामिल होंगे।
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उन्होंने कहा कि सरकार आमजन की समस्याओं का समाधान करने में विफल रही है। आज देश में कोरोना संक्रमण बढ़ने से लोग परेशान हैं। लेकिन सरकार के पास बचाव के कोई उपाय नजर नहीं आ रहे हैं। कोरोना संक्रमण को देखते हुए किसानों ने आंदोलन की रणनीति में कुछ बदलाव किए हैं। अब धरनास्थलों पर ज्यादा भीड़ के बजाय शिफ्टों में किसान बुलाए जा रहे हैं। केंद्र सरकार कोरोना की आड़ में धरने समाप्त कराना चाहती हैं लेकिन किसान उठने वाला नहीं है।
उन्होंने कहा कि किसानों ने इस आंदोलन को अपने नियमित जीवन का हिस्सा बना लिया है। केंद्र सरकार ने हमारी मांगों को अभी तक नहीं माना है। अगर वो पांच साल तक सरकार चला सकते हैं तो हम अपने आंदोलन को भी अगले पांच साल तक जारी रख सकते हैं। मांगे नहीं मानी गई तो 2024 तक सड़क पर बैठेंगे। इसके साथ ही खेड़ा बॉर्डर पर रोजा इफ्तार का दौर आज 17वें दिन भी जारी रहा। सभी किसानों ने मिल-जुलकर रोजा-इफ्तार किया। शनिवार की समूह चर्चाओं और रोजा-इफ्तार में बाबा जैमल सिंह, बाबा सुखदेव सिंह, पृथ्वी सिंह, जापान सिंह, मौलाना दिलशाद, अमजद भाई, फजरु भाई, साजिद भाई, अब्दुल भाई, अमराराम, रामकिशन महलावत, राजाराम मील, बलवीर छिल्लर, तारा सिंह सिद्ध, पेमाराम, गणपत सिंह, रघुवीर सिंह, ज्ञानी राजवीर सिंह, महावीर सिंह सरपंच, अनिल भेरा, जय सिंह जनवास, ओम प्रकाश, कुलदीप मोहनपुर, ज्ञानी राम मंडोली, जोगेन्द्र यादव, पवन दुग्गल, अंकुश सोलंकी, राकेश विश्नोई, रविन्द्र तरखान, पृथ्वी बुढानिया, राकेश फगेडिया, संतबीर सिंह, हृषिकेश कुलकर्णी व सतपाल यादव सहित अन्य मौजूूद रहे।
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