रेवाड़ी। कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन 193वें दिन भी जारी रहा। धरनास्थल पर एक बार फिर से किसानों की संख्या बढ़ने लगी है। शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन धरनास्थल पर किसानों के जत्थे पहुुंचे। लंबे समय बाद खेड़ा बॉर्डर पर किसानों की चहल-पहल दिखाई देने लगी हैं।
इसके अलावा समूह चर्चा में किसानों ने कहा कि कृषि के तीनों काले कानूनों को रद्द होने तक किसान घर वापस नहीं लौटेंगे। बता दें कि दिल्ली कूच करते समय हरियाणा पुलिस ने राजस्थान के किसानों को दिल्ली-जयपुर स्थित खेड़ा बॉर्डर पर रोक दिया था। उसके बाद से राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों के किसानों से यहीं पर अपना पड़ाव डाल दिया। किसानों के पड़ाव के साथ ही आसपास के क्षेत्रों के किसानों ने भी आंदोलित किसानों के साथ आ गए।
शुक्रवार को किसानों को संबोधित करते हुए चौधरी बलबीर, रामकिशन महलावत व रणजीत राजू ने कहा कि देश की तानाशाह सरकार की जिद के कारण देशभर के किसान 44 डिग्री तापमान में भी सड़कों पर जीवनयापन कर रहा है। जिस देश का अन्नदाता सड़कों पर जीवन व्यतीत कर रहा हो, वहां का नागरिक कैसे खुशहाल जीवन जी सकता है। लेकिन केंद्र की तानाशाही सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
उन्होंने कहा कि केंद्र व हरियाणा प्रदेश की सरकारें किसानों के आंदोलन को किसी न किसी बहाने बदनाम करने की कोशिश कर रही है। लेकिन किसान अनुशासित ठग से आंदोलन को चला रहे हैं। केंद्र सरकार कृषि कानूनों को रद्द करने पर विचार नहीं कर रही है, बल्कि आंदोलन को खराब करने के लिए लोगों को आपस में लड़ाने का प्रयास कर रही है। तीनों कृषि कानून देश के किसानों को बर्बाद करने वाले हैं। इसलिए केंद्र सरकार को बिना समय गवाए रद्द कर देना चाहिए। इस अवसर पर रामकिशन महलावत, राजाराम मील, ईश्वर महलावत, अमरा राम व नवीन कुमार सहित अन्य किसान मौजूद रहे।