संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए योजनाएं चला रही है। इसी क्रम में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के माध्यम से मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना चल रही है जिसका उद्देश्य मिट्टी की उर्वरता, संरचना एवं सेहत को बढ़ाना है। किसानों को इसका लाभ लेना चाहिए। ये बातें उपायुक्त राहुल हुड्डा ने किसानों को जागरूक करते हुए कहीं।
उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत एक कार्ड दिया जाता है, जिसके माध्यम से किसान अपने खेत की जमीन की मिट्टी का प्रकार जान सकते हैं। यदि किसानों को अपने खेत की मिट्टी का प्रकार पता होगा तो उन्हें मिट्टी की गुणवत्ता के अनुसार फसल लगाने में आसानी होगी और अच्छी खेती की जा सकेगी एवं ज्यादा मुनाफा प्राप्त किया जा सकेगा। बताया कि मृदा हेल्थ कार्ड के माध्यम से किसानों को यह भी जानकारी प्रदान की जाती है कि मिट्टी के अंदर कितनी मात्रा में क्या चीज है एवं किस फसल के लिए कितनी खाद और कौन सी खाद का उपयोग किया जाए। भारत में कुल आठ प्रकार की मिट्टी पाई जाती है, जिनकी उर्वरक क्षमता अलग-अलग है। इसमें जलोढ़ मिट्टी, काली मिट्टी, लाल और पीली मिट्टी, जंगली मिट्टी, मरू मिट्टी, लैटेराइट मिट्टी, नमकीन मिट्टी और पीट मिट्टी शामिल है।
कृषि विभाग को जमा करें मिट्टी के नमूने
डीसी ने कहा कि किसान अपने नजदीकी कृषि विभाग अर्थात मृदा स्वास्थ्य परीक्षण केंद्र पर मिट्टी के सैंपल को जमा करवा दें। कुछ समय बाद मृदा स्वास्थ्य प्रशिक्षण कार्ड किसान को उपलब्ध करा दिया जाता है। मृदा वैज्ञानिक अनुसार मिट्टी में कुल 16 पोषक तत्व होते हैं जो कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर, जिंक, आयरन, कॉपर, बोरान, मैगनीज, मोलिब्डेनम, क्लोरीन हैं।