किसानों को जागरूक करती टीम। स्रोत : डीपीआरओ
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रेवाड़ी। हरियाणा सरकार की तरफ से फसल अवशेष प्रबंधन करने के लिए सीआरएम स्कीम लागू की हुई है। सहायक कृषि अभियंता इंजी. दिनेश शर्मा और कृषि विकास अधिकारी (कृषि यंत्र) इंजी. सुनील कुमार ने गांव करावरा मानकपुर, आशियाकी गौरावास का दौरा कर किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जागरूक किया।
उन्होंने बताया कि पराली का प्रबंधन करने के लिए किसानों के पास विकल्प मौजूद है। किसान सुपर सीडर, रिर्वसीबल एमबी प्लॉव, जीरो टिल सीड ड्रील, रोटावेटर व हैरो आदि की सहायता से धान की फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाएं। उन्होंने बताया कि पराली को जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है व मिट्टी की जैविक गुणवत्ता प्रभावित होती है। मिट्टी में मौजूद मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं।
सहायक कृषि अभियंता व कृषि विकास अधिकारी (कृषि यंत्र) ने रबी सीजन में गेहूं की बिजाई करने वाले किसानों से सुपर सीडर, जीरो टील सीड ड्रिल तकनीक अपनाने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि धान की कटाई और बिजाई के बीच उचित प्रबंधन से फसल की बेहतर स्थापना होती है और पराली प्रबंधन भी सुचारु रूप से किया जा सकता है। सुपर सीडर, जीरो टील सीड ड्रिल मशीन से गेहूं की बिजाई करने से समय के साथ-साथ किसान की पैसों की भी बचत होती है व पराली को खेत की मिट्टी में मिलाने से जमीन की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ती है और पैदावार में भी इजाफा होता है।