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Rewari News: दो गांवों के किसानों को पराली नहीं जलाने के लिए किया प्रेरित

Tue, 04 Nov 2025 11:54 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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फोटो : 14किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन की जानकारी देते कृषि अधिकारी। स्रोत : विभाग
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रेवाड़ी। सहायक कृषि अभियंता इंजीनियर दिनेश शर्मा और कृषि विकास अधिकारी (कृषि यंत्र) इंजीनियर सुनील कुमार ने मंगलवार को गांव करावरा मानकपुर और आशियाकी गौरावास में किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन (पराली प्रबंधन) के प्रति जागरूक किया।
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अधिकारियों ने बताया कि आज किसानों के पास पराली प्रबंधन के लिए कई बेहतर विकल्प मौजूद हैं। किसान सुपर सीडर, रिवर्सिबल एमबी प्लॉ, जीरो टिल सीड ड्रिल, रोटावेटर और हैरो जैसी मशीनों की सहायता से धान की फसल के अवशेषों को मिट्टी में मिला सकते हैं।
हरियाणा सरकार ने किसानों की सहायता के लिए सीआरएम स्कीम लागू की है। इस योजना के तहत पराली न जलाने और उसका प्रबंधन करने वाले किसानों को 1200 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
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इसके लिए कृषि विभाग ने 119 गांवों में 121 नोडल अधिकारी नियुक्त किए हैं, जो किसानों को जागरूक करने और प्रोत्साहन राशि की प्रक्रिया में सहायता कर रहे हैं।
अधिकारियों ने कहा कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, मिट्टी की जैविक गुणवत्ता घटती है और मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं, जिससे फसल उत्पादन प्रभावित होता है। पराली जलाने से पीएम. 2.5 का स्तर बढ़कर सांस व फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों को जन्म देता है।
रबी सीजन को ध्यान में रखते हुए इंजीनियर दिनेश शर्मा और सुनील कुमार ने किसानों से सुपर सीडर और जीरो टिल सीड ड्रिल तकनीक अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इन मशीनों से गेहूं की सीधी बुवाई करने से समय और धन दोनों की बचत होती है, साथ ही मिट्टी की उपजाऊ शक्ति और उत्पादन क्षमता भी बढ़ती है।
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