संबोधित करते किसान यशपाल। स्रोत : किसान
डहीना। गांव कंवाली की रेतीली धरती से उठी एक कहानी आज हजारों किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है। यह कहानी है किसान रत्न अवॉर्डी यशपाल खोला की। युवा किसान ने पारंपरिक खेती की सीमाओं को तोड़ते हुए प्राकृतिक कृषि को अपना जीवन मिशन बना लिया है।
जहां रेतीली जमीन को अक्सर खेती के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता है, वहीं उन्होंने प्राकृतिक खेती का सफल मॉडल खड़ा कर दिखाया है। बिना रासायनिक खाद और कीटनाशकों के, कम लागत में अधिक उत्पादन की दिशा में उनका कार्य आज एक मिसाल बन चुका है।
उनकी इस यात्रा में अरावली किसान क्लब और धारूहेड़ा एग्रो फार्म जैसे मंचों की अहम भूमिका रही है। इन माध्यमों से उन्होंने किसानों को न केवल प्रशिक्षण दिया, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की राह भी दिखाई। खेत पर सीखो और सिखाओ की परंपरा को मजबूत करते हुए उन्होंने किसानों के बीच भरोसे का मजबूत नेटवर्क तैयार किया।
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सबसे बड़ी ताकत है जुड़ाव
यशपाल खोला ने बताया कि उनकी सबसे बड़ी ताकत है जुड़ाव। उन्होंने किसानों को केवल खेती के तरीके नहीं सिखाए, बल्कि एक नई सोच दी। प्राकृतिक खेती के जरिए आय कैसे बढ़ाई जाए और मिट्टी की सेहत कैसे बचाई जाए।
उन्होंने मार्केटिंग का भी एक मजबूत मॉडल विकसित किया, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके और वे बिचौलियों पर निर्भर न रहें। आगे बताया कि
उन्हें कई मंचों पर आमंत्रित किया गया, जहां उन्होंने अपने व्यावहारिक अनुभवों को वैज्ञानिकों और किसानों के साथ साझा किया। उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले हैं जिनमें किसान रत्न अवार्ड, राष्ट्रपति सम्मान (एट होम प्रोग्राम) सम्मान शामिल हैं।