रेवाड़ी। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर पर 80 दिन से आंदोलन कर रहे किसानों को समर्थन देने के लिए विभिन्न जिलों के किसान पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही लोक कलाकारों द्वारा कृषि कानूनों से होने वाले नुकसानों के बारे में गीतों के माध्यम से बता रहे हैं। वहीं बावल चौरासी के किसान भी रोजाना रोस्टर के हिसाब के धरनास्थल पर पहुंच रहे हैं।
बता दें कि कृषि कानूनों का विरोध करने के लिए दिल्ली कूच कर रहे राजस्थान के किसानों को हरियाणा पुलिस ने 13 दिसंबर को हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर पर रोक दिया था। उसके बाद से सैकड़ों किसान यहीं पर धरना दे रहे हैं। खेड़ा बॉर्डर पड़ाव का नेतृत्व स्वराज इंडिया के संयोजक योगेंद्र यादव द्वारा किया जा रहा है।
-क्रांति कभी मरती नहीं : महलावत
मंगलवार को आमसभा को संबोधित करते हुुए भाकियू के प्रदेश सचिव रामकिशन महलावत ने कहा कि क्रांति कभी मरती नहीं है। किसान आंदोलन एक ऐतिहासिक आंदोलन है। जब-जब इस आंदोलन की थकने, ठहरने और टूटने की चर्चा होती है, तब-तब यह नए स्वरूप में आगे बढ़ता है और फैलता गया है। उन्होंने कहा कि क्रांतिकारी को मारा जा सकता है, क्रांति को नहीं।
-सभा को इन नेताओं ने किया संबोधित
आमसभा को संबोधित करने वालों में रेशम सिंह, काला मंडार, अनमोल सिंह जोशन, सुखमंदर सिंह सरपंच, हरनाथ सिंह बुट्टर, हरगोबिंद सिंह, हरजीत सिंह ढिल्लो, किशन कुमार, ममता परनामी, भगत सिंह पूनिया, ईशा शर्मा, मा. रघुवीर सिंह, ज्ञानी राजवीर सिंह, संदीप, नवीन, मो. फजरू मेवाती, गोपीचंद गुर्जर व हारून खान सहित अन्य शामिल रहे। आमसभा का संचालन डॉ. संजय माधव द्वारा किया गया।