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Rewari News: मिड-डे-मील का डाटा न देने पर 46 विद्यालयों से मांगा स्पष्टीकरण

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रेवाड़ी। कुंभावास स्थित राजकीय विद्यालय में भोजन बनाती महिलाएं। संवाद
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रेवाड़ी। सरकारी विद्यालयों में पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को परोसे जाने वाले मिड-डे मील की रिपोर्ट एएमएस पोर्टल पर प्रतिदिन अपडेट करने के आदेश सभी विद्यालयों को मिले थे। फिर भी जिले के कुछ ऐसे विद्यालय हैं जो शिक्षा निदेशालय के इस आदेश को ठेंगा दिखा रहे हैं। अब इसको लेकर मौलिक स्कूल शिक्षा निदेशालय ने जिले के 46 विद्यालयों के मिड-डे मील इंचार्ज की ओर से रिपोर्ट अपलोड नहीं करने पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। सभी इंचार्ज को तीन कार्य दिवस के अंदर स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को उनके स्तर पर कार्रवाई कर निदेशालय को रिपोर्ट देने के भी निर्देश दिए गए हैं। बता दें कि सत्र के शुरुआत में ही शिक्षा निदेशालय ने सभी विद्यालयों के मुखियाओं को यह आदेश दिए थे कि विद्यालय के मिड-डे मील इंचार्ज रोजाना विद्यार्थियों को ताजा बना हुआ भोजन परोसे जाने की रिपोर्ट एएमएस पोर्टल पर अपडेट करनी होगी। विभाग के निर्देश के बावजूद भी कुछ विद्यालयों ने एएमएस पोर्टल पर डाटा अपलोड नहीं किया है। अब निदेशालय ने उन विद्यालयों से जवाब मांगा है।
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मॉनिटरिंग सीधे निदेशालय की ओर से की जा रही
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब इसकी मॉनिटरिंग सीधे निदेशालय की ओर से की जा रही है, ताकि भोजन में किसी प्रकार की कमी न रह सके। यही वजह है कि निदेशालय ने संज्ञान लेते हुए सभी से स्पष्टीकरण मांगा है। उसके बावजूद कार्य में कोताही बरती जाती है तो इस पर कड़ा संज्ञान भी लिया जा सकता है।

जिले के 638 विद्यालयों में मिलता है मध्याह्न का भोजन
गौरतलब है कि जिले में करीब 638 राजकीय विद्यालयों में रोजाना मिड-डे मील बच्चों को परोसा जाता है। मिड-डे मील योजना आने के बाद से भोजन की कभी-कभी चेकिंग विद्यालय स्तर पर ही होती थी, जिसके चलते मिड-डे मील पर हर वर्ष कई मामले देखने को मिलते थे। यही कारण है कि शिक्षा निदेशालय ने मिड-डे मील में परोसे जाने वाले भोजन का रिकॉर्ड रोजाना विद्यालय इंचार्ज को एएमएस पोर्टल पर अपडेट करने के आदेश दिए गए हैं।
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क्या है मिड-डे मील योजना
मिड-डे मील योजना के तहत सरकारी विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार के आहार प्रदान किया जाता है। इसमें पुलाव, काला चना दाल, राजमा चावल, पूरी पकौड़ी चावल, हलवा, पराठा, दलिया, पूरी से लेकर फल व दूध विद्यार्थियों की डाइट में शामिल है। मिड-डे मील योजना का लाभ उस विद्यार्थी को मिलता है, जो प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के सरकारी और सरकारी अनुदानित निजी स्कूलों में अध्ययन कर रहा होता है। इस योजना को लाने का मुख्य उद्देश्य गरीब वर्ग के छात्रों को स्कूल में ही उन्नति और उच्चतर शिक्षा के लिए प्रोत्साहन देना और उनकी एक स्वस्थ दिनचर्या का ध्यान रखना है।
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वर्जन :
जिले के 46 विद्यालयों के मिड-डे मील इंचार्ज की ओर से रिपोर्ट अपलोड नहीं किया है। इसको लेकर सभी विद्यालयों के इंचार्ज को पत्राचार कर निर्देश दिए गए हैं कि जल्द ही वे सभी स्पष्टीकरण दें, ताकि आगे की कार्रवाई अमल में लाई जा सके।
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-अली अहमद, जिला प्रभारी, मिड-डे मील रेवाड़ी।
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