संवाद न्यूज एजेंसी
कोसली। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय अर्बन रूरल मिशन के तहत वर्ष 2020 में कोसली उपमंडल के 18 गांवों को जोड़कर इनमें शहरी सुविधाएं देने के लिए ग्रामीण आजीविका मिशन योजना की शुरूआत की गई थी। पांच साल बीतने के बाद भी इन गांवों में शहर जैसी सुविधाएं नहीं दी जा सकीं।
योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में गरीबी और बेरोजगारी को दूर करना और स्थानीय आर्थिक विकास को प्रोत्साहित कर क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना था। उस समय कोसली क्लस्टर के 18 गांवों में इस योजना के तहत विकास कार्य कराने की बात की गई थी। मिशन का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी अंतर को कम कर गांवों को विकसित करना था। ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत कौशल विकास प्रशिक्षण, कृषि प्रसंस्करण, कृषि सेवा भंडारण, वेयरहाउसिंग, मोबाइल हेल्थ यूनिट, स्कूल में जलापूर्ति, स्ट्रीट लाइट, गांव के बीच संपर्क मार्ग, डिजिटल साक्षरता, सोलर लाइट, ई-ग्राम कनेक्टिविटी के लिए सिटिजन सर्विस सेंटर भी स्थापित किए जाने थे।
उस समय अधिकारियों ने अपने से जुड़े दायित्वों का निर्वाह पूर्ण निष्पक्ष निष्ठा एवं ईमानदारी से करने को कहा था। यह निर्देश दिया गया था कि जो अधिकारी लापवाही बरतेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद भी स्थिति नहीं सुधरी।
इन गांवों को किया गया था चयनित
योजना के तहत कोसली क्लस्टर कोसली, नाहड़, गूगोढ़, नठेड़ा, गुड़ियानी, सुरेहली, नेहरूगढ़, भाकली व भाकली टू सादत्त नगर, जुडड़ी, छव्वा कान्हड़ वास, मुंदड़ा मलेशियावास, शादीपुर गांव चयनित किए गए थे। नाहड़ खंड के इन गांवों को इस योजना के लिए कोसली क्लस्टर के नाम से जाना गया था। उम्मीद थी इस योजना के साथ क्लस्टर के इन गांवों विकास कार्य होंगे, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।
योजना के तहत नहीं मिला लाभ
गांव भाकली 2 में इस योजना का लाभ मामूली बिजली सुधार के रूप में मिला। बिजली निगम की ओर से कुछ जगह लाइन दुरुस्त की गई। इसके अलावा अन्य कोई लाभ नहीं मिल पाया। इसी प्रकार स्वास्थ्य मोबाइल यूनिट भी नहीं मिल पाई। क्लस्टर के नाहड़, भाकली 2, कोसली, गुडियानी सहित अनेक गांवों में गलियों की हालत भी अच्छी नहीं है। ना ही क्षेत्र के किसी भी गांव में वेयरहाउसिंग जैसी सुविधा मिल पाई।
वर्जन
योजना के तहत कोसली क्लस्टर के गांवों में बिजली, पानी, परिवहन जैसी सुविधाएं दी गई हैं। कुछ गांवों में स्ट्रीट लाइट भी चालू हो रही है।-अनिल यादव, बीडीपीओ।