रेवाड़ी। जिले में औद्योगिक इकाईयों को विस्तार देने के लिए मई 2020 में लाई गई कलक्टर प्लग और प्ले योजना का प्रदर्शन संतोषजनक दिखाई नहीं दे रहा है। योजना के लागू होने के 5 साल बाद भी औद्योगिक इकाइयों की संख्या में अधिक इजाफा देखने को नहीं मिला है।
इसका कारण जमीनों का महंगे दामों में मिलना है, क्योंकि उद्योग के लिए जमीन इंडस्ट्रियल एरिया में नहीं मिल पा रही है। वहां पर जगह ही उतनी नहीं हैं, जितनी एक उद्योग के लिए जरूरत है। जिले में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) की 200 से अधिक इकाईयां हैं। करीब 250 सूक्ष्म उद्योग हैं। हालांकि, ऑटो सेगमेंट में बीते 5 वर्षों में थोड़ा बहुत विस्तार देखने को जरूर मिला है। कारोबारियों का कहना है कि जिले में औद्योगिक विकास की रफ़्तार काफी धीमी है और यह मास्टर प्लान 2031 में भी देखने को मिल सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि जिले के मास्टर प्लान में भी औद्योगिक विस्तार को लेकर ज्यादा स्थान नहीं मिला है। इसके कारण भी कारोबारी काफी दुखी हैं। कई कारोबारी तो जिले से बाहर अपना उद्योग लगा चुके हैं और कुछ कारोबारी उद्योग को स्थापित करने की प्रक्रिया में हैं। धारूहेड़ा बावल में औद्योगिक क्षेत्र है तो वहां पर सुविधाएं नहीं हैं। कारोबारी का कहना है कि औद्योगिक विकास के लिए इंडस्ट्रियल क्षेत्र को बढ़ाने की जरूरत है।
चार खंड़ो में था फोकस, नहीं हुआ विस्तार
क्लस्टर प्लग एवं प्ले योजना के तहत राज्य सरकार की तरफ से औद्योगिक विकास को समुचित बढ़ावा देने के लिए जिले के 4 खंडों को भी शामिल किया है। धारूहेड़ा व बावल के अलावा जिला के नाहड़, जाटूसाना, खोल व डहीना खंड को इसमें शामिल किया है ताकि इसके तहत लघु उद्योगों को रियायत देकर बढ़ावा दिया जा सके। इसके तहत विकसित किए जाने वाले औद्योगिक क्षेत्र के लिए सीएलयू से राहत भी दी है। उसके बावजूद विस्तार नहीं हो पाया है।
इस वजह से शुरू की थी क्लस्टर योजना
गुरुग्राम, फरीदाबाद, रेवाड़ी और सोनीपत की तर्ज पर सभी जिलों में समुचित औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश सरकार ने वर्ष 2020 में क्लस्टर योजना शुरू की थी। इसके तहत उन जिलों का चयन किया गया है, जहां पर औद्योगिक इकाइयों की संख्या कम है। सभी जिलों में क्लस्टर बनाते हुए स्थानीय महत्व के अनुसार लघु उद्योग विकसित किए जाएंगे। योजना में लाभार्थी कोई भी बिजनेस शुरू कर सकता है। बिजनेस को शुरू करने के लिए सरकार के स्तर पर जमीन, बिजली-पानी सहित अन्य सुविधाएं दी जाती हैं।
क्लस्टर प्लग एंड प्ले योजना को 30 जून तक बढ़ाया
हरियाणा में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) को राहत देते हुए प्रदेश सरकार ने क्लस्टर प्लग एंड प्ले योजना को 30 जून तक बढ़ा दिया है। नई क्लस्टर प्लग एंड प्ले योजना बनाने पर भी काम शुरू कर दिया गया है, जिसमें छोटे उद्यमियों को कई तरह की सुविधाएं दी जाएंगी। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ने हरियाणा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम नीति-2019 के तहत नई योजना तैयार होने तक पुरानी क्लस्टर प्लग एंड प्ले योजना को जारी रखने के आदेश दिए हैं।
वर्जन
जिले में इंडस्ट्रियल जमीन काफी कम है। जहां पर औद्योगिक इकाइयों के लिए संभावना है, वहां पर जमीन काफी महंगी है और वह इंडस्ट्रियल क्षेत्र भी नहीं है। इसी वजह से योजना के बाद भी बीते 5 सालों में औद्योगिक इकाइयों में ज्यादा विस्तार देखने को नहीं मिला है। अगर सरकार औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ाए तो विस्तार देखने को मिल सकता है। सूक्ष्म उद्योग के लिए अगर सरकार कुछ करे तो इसका स्थानीय लोगों को काफी फायदा मिल सकता है, क्योंकि इसके लिए जमीन की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती है।
-संजय डाटा, अध्यक्ष, लघु उद्योग भारती।