नागरिक अस्पताल में शनिवार को पांच घंटे से ज्यादा बिजली कटौती से मरीजों और तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सबसे ज्यादा दिक्कत एक्स-रे के लिए आए मरीजों को उठाना पड़ा। हालात इतने खराब थे कि दुर्घटना में घायल मरीजों को भी निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ा। सुबह दस से लेकर दोपहर बाद तीन बजे तक बिजली कटौती ने नागरिक अस्पताल में मरीजों को बेहाल कर दिया। इस दौरान जेनरेटर की भी सांसें फूल गईं।
शहर के नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन करीब 1700 की ओपीडी और ट्रॉमा सेंटर में प्रतिदिन 100 दुर्घटनाग्रस्त केस आते हैं। ऑपरेशन थियेटर हो या फिर अन्य मेडिकल उपकरण सभी को चलाने के लिए बिजली की आवश्यकता पड़ती है। अस्पताल में कहने के लिए तो जनरेट सेट उपलब्ध है लेकिन कम क्षमता होने के कारण इससे छोटे उपकरण ही चलाए जा सकते हैं। पांच घंटे के दौरान जनरेटर भी कई बार दम तोड़ गया।
चार घंटे इंतजार के बाद भी नहीं हुआ उपचार
नागरिक अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में उपचार के लिए आए गंभीर मरीजों को चार घंटे से ज्यादा इंतजार करने के बाद बिना उपचार लौटना पड़ा। आलम यह था कि ट्रॉमा में तो मरीज 50 किलोमीटर दूर से आए थे। मरीजों ने बताया कि डॉक्टरों ने उनको यह कहकर लौटा दिया कि लाइट नहीं है। फ्रैक्चर के बाद ट्रॉमा सेंटर में आए घायलों को उनके तीमारदार निजी अस्पतालों में गए।
एसएनसीयू में भी स्थिति रही खराब
नवजातों के लिए बनाए एसएनसीयू वार्ड में बत्ती गुल का खामियाजा नौनिहालों को भी झेलना पड़ा। वैसे तो आपात स्थिति के लिए एसएनसीयू के उपकरणों को जनरेटर से जोड़ा गया है। बार-बार बंद होने के कारण बच्चों को गर्म रखने के लिए रखी मशीनें नहीं चल पाई। इसी के साथ कंगारू यूनिट भी बिजली के अभाव में बंद पड़ी रही।
दवाइयां खराब होने का खतरा
नागरिक अस्पताल में आने वाली सात सौ से ज्यादा दवाइयों में कुछ ऐसी दवाइयां होती हैं, जिनका तापमान बनाए रखना जरूरी होता है। इसके लिए नागरिक अस्पताल में विशेष तौर पर फ्रिज रखे हैं। शनिवार को पांच घंटे से ज्यादा बिजली गुल रहने से फ्रिज और एसी नहीं चले।
ओटी की भी अटकी रही सांसें
ऑपरेशन थियेटर के लिए नागरिक अस्पताल में बिजली की निर्बाध सप्लाई के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। हॉटलाइन से जुड़ा होने के बावजूद भी इतने लंबे समय से लाइन जाना गंभीर विषय है। हालांकि ओटी जनरेटर से जुड़ा हुआ है, लेकिन जनरेटर की के दम तोडने के बाद ओटी की भी सांसे अटकी रही।
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शनिवार को अपने जानकार को अस्पताल में लेकर गया था, लेकिन यहां पर डॉक्टर ने बिजली नहीं होने की बात कही। करीब दो घंटे इंतजार करने के बाद भी कुछ नहीं हुआ तो मरीज को निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। - कुलदीप सैनी, तीमारदार, रेवाड़ी
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पैर में फ्रैक्चर होने बाद भाई रेवाड़ी लेकर आया था। महेंद्रगढ़ में सुविधा नहीं होने के कारण अच्छे उपचार की आशा लेकर पचास किमी. चलकर रेवाड़ी आए थे। यहां पर एक्स-रे वालों ने लाइन नहीं होने की बात कहकर बाद मे आने के लिए कहा। इसके बाद मजबूरी में रेवाड़ी के ही निजी अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। - महीपाल, मरीज, महेंद्रगढ़
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काम करते वक्त हाथ केे अंगुठे में चोट लग गई थी। डॉक्टर ने चेक करने के बाद एक्स-रे के लिए भेजा तो यहां पर लाइन नहीं होने की बात कही। तीन घंटे से ज्यादा समय से इंतजार करने के बाद बाहर जाने के लिए कह दिया गया। इसके बाद किसी से पैस मांगकर बाहर से एक्स-रे कराया। - गजेंद्र, मरीज हासांका