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विकास में रोड़ा बन रही भाजपाइयों की जिला परिषद में गुटबाजी

Sat, 15 Oct 2016 11:43 PM IST
ब्यूरो /अमर उजाला
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जिला परिषद में भाजपा पार्षदों की खेमाबंदी जिले के विकास पर भारी पड़ने लगी है। इसी वजह से करीब तीन करोड़ रुपये की ग्रांट का छह माह तक वितरण नहीं हो सका है। वीरवार को जब ग्रांट का वितरण भी हुआ तो भाजपा के ही पार्षदों ने भेदभाव का आरोप लगाकर जिला परिषद की बैठक का बहिष्कार कर दिया।
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रेवाड़ी जिला परिषद में कुल 18 पार्षद हैं। इनमें से अधिकांश पार्षद भाजपा से हैं। जिला परिषद बोर्ड के गठन से पूर्व ही जिला परिषद केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह और कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह खेमे से जुड़ी रही है। जिला प्रमुख के चुनाव के समय भी दोनों गुटों ने बराबर वोट हासिल किए। ऐसे में पर्ची के माध्यम से जिला प्रमुख का चुनाव हुआ और केंद्रीय मंत्री समर्थक मंजू बाला को जिला प्रमुख की कुर्सी हासिल हुई। सीट हारने के बाद भी दूसरा पक्ष शांत नहीं बैठा और विरोध का माहौल बनाए रखा।

फूट से उपजिला प्रमुख नहीं बना सकी भाजपा
जिला उपप्रमुख के चुनाव के दौरान भी वही खेमेबंदी भाजपा को भारी पड़ी। एक समय तक नरबीर खेमे में रहे इनेलो के कोसली हलका प्रधान जगफूल एन वक्त पर पाला बदलकर राव इंद्रजीत के खेमे मेें चले गए। तभी दूसरे खेमे ने जगफूल को अपनी तरफ से उपप्रधान पद का दावेदार घोषित कर दिया। उपप्रधान चुनाव में पड़ी पर्ची ने एक बार फिर राव इंद्रजीत सिंह खेमे का साथ दिया और इनेलो के जगफूल को उप प्रधान की कुर्सी हासिल हुई।
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पहले तीन बैठकें चढ़ चुकी हंगामे की भेंट
जिला परिषद के गठन के बाद जिला प्रमुख मंजू बाला ने ग्रांट वितरण के लिए कुल तीन बैठकें बुलाई। दूसरे पक्ष के पार्षदों के विरोध के चलते सभी बैठकें हंगामे की भेंट चढ़ी और ग्रांट का वितरण नहीं हो सका। अब जब वीरवार को ढाई करोड़ रुपये की ग्रांट का वितरण भी हुआ तो दूसरे पक्ष के पार्षदों ने अपने समर्थित पार्षदों को ग्रांट का पैसा बहुत कम या बिल्कुल ही नहीं देने का आरोप लगाकर विरोध में बैठक का बहिष्कार कर दिया।

जिला विकास समिति का भी नहीं हो सका गठन
भाजपा के पार्षदों की गुटबाजी का नतीजा रहा कि गत दिनों मिनी सचिवालय में जिले के विकास के लिए बनाई जाने वाली नीतियों के लिए जरूरी जिला विकास परिषद का गठन भी नहीं हो सका। इस बैठक में दूसरे खेमे के पार्षद अपने साथ बाहरी लोगों को ले आए और जब जिला प्रमुख ने इसका विरोध किया तो दूसरे खेमे के पार्षद बैठक छोड़कर चलते बने। उस समय समिति के गठन के लिए पूरा कोरम था। जिला विकास समिति का गठन आसानी से किया जा सकता था लेकिन यही खेमेबंदी एक बार फिर जिले के विकास पर भारी पड़ी।

स्थानीय नेता भी दे रहे खेमेबंदी को हवा
जिला परिषद के गठन के बाद से भाजपा के दोनों दिग्गज नेताओं ने प्रत्यक्ष रूप से जिला परिषद के कार्य में कोई दखल नहीं दिया। दोनों ही गुटों के स्थानीय नेता इस गुटबाजी को हवा देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। जब कभी मौका मिलता है दोनों ही पक्षों के नेता एक-दूसरे की हवा निकालने में लगे रहते हैं। ऐसा ही वीरवार को भी हुआ। जिला परिषद की बैठक समाप्त होने के बाद दोनों पक्षों ने बैठकें की। इन बैठकों में आगे की रणनीति तैयार की गई।

ऐसे तो आगे भी आएगी दिक्कत
प्रदेशभर की सभी जिला परिषदें राज्य सरकार से जिला परिषदों को राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बराबर अधिकार देेने की मांग करती आई हैं। इसी को देखकर गत सप्ताह पंचायती राज्यमंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने पंचायतों को मिलने वाली ग्रांट का दस फीसदी हिस्सा जिला परिषद को देने की घोषणा की। इसी के साथ सीएम अनाउंसमेंट में जिले पर होने वाले खर्चे में भी जिला परिषद का अहम रोल होता है लेकिन जिला परिषद में जिस तरह से गुटबाजी चल रही है उसको देखकर कहा जा सकता है कि जिले के विकास में मुसीबत खड़ी करेगी।
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 मैं भाजपा से ही हूं। बाहर की नहीं हूं। मुझे पूरे जिले को देखना है। अभी ग्रांट का वितरण आवश्यकता के अनुसार हुआ है। आगे जो भी ग्रांट आएगी। उसे प्लान बनाकर वितरित किया जाएगा। - मंजू बाला, चेयरपर्सन, जिला परिषद, रेवाड़ी

जिला परिषद में हमें दूसरे खेमा का बताकर हमारे साथ भेदभाव किया जा रहा है। वीरवार को ग्रांट वितरण में भी ऐसा ही हुआ। हम भाजपा के कार्यकर्ता हैं। हम लोगों ने तत्कालीन जिलाध्यक्ष के साथ मिलकर भाजपा का जिला प्रमुख बनाने की कोशिश की लेकिन किन्हीं कारणों से वह नहीं बन सकी।  - अमित यादव, जिला पार्षद, वार्ड -5
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