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जिले के 40 स्कूल एक शिक्षक के भरोसे

Mon, 01 Aug 2016 12:43 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला
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40 राजकीय स्कूल में केवल एक शिक्षक - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिलेभर के 40 से अधिक राजकीय प्राथमिक स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। ये शिक्षक अध्यापन के साथ लिपिक का कार्य भी कर रहे है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इससे बच्चों के अभिभावकों में शिक्षा विभाग के खिलाफ रोष है। अभिभावकों ने विभाग से स्कूलों में शिक्षकों और अन्य स्टाफ की नियुक्ति करने की मांग की है।
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जानकारी के अनुसार जिले भर में 406 राजकीय प्राथमिक स्कूल हैं। अधिकांश स्कूलों में शिक्षकों एवं संसाधनों की कमी है। वहीं 40 स्कूल तो एक ही शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। एक ही शिक्षक होने के कारण उसे अध्यापन के साथ बाबूगिरी भी करनी पड़ती है। इसका सीधा-सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है।

रेवाड़ी और बावल खंड के 24 स्कूल एक शिक्षक के भरोसे
रेवाड़ी खंड में कुल 113 स्कूल हैं, जिनमें से 12 स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। इन स्कूलों में बालियर कलां, गिंदोखर, खलीपुरी, नंगली गोधा, नयागांव दौलतपुर, रोजका, ठोठवाल आदि गांव शामिल हैं। खंड के कुल राजकीय प्राथमिक स्कूलों में कुल शिक्षकों की 395 संख्या स्वीकृत है, जिनमें से 26 सीटें रिक्त हैं। वहीं बावल खंड में 108 स्कूलों के लिए 322 सीटें स्वीकृत हैं, जबकि बावल में अभी 24 सीटें रिक्त हैं, वहीं 12 स्कूलों में केवल एक शिक्षक है। इसी कड़ी में खंड खोल में 8 प्राथमिक स्कूलों को एक-एक शिक्षक चला रहे हैं। इनमें गोलियाकी, नांगल मायन, पुनसिका, ढाणी भालखी आदि गांव के प्राथमिक स्कूल शामिल है। नाहड़ में स्वीकृत 145 पदों में से 2 पद रिक्त हैं।
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दुल्हेड़ा खुर्द में 92 बच्चों का भविष्य दो शिक्षकों के हाथ में
बावल खंड के गांव दुल्हेड़ा खुर्द स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में 100 के लगभग बच्चों का भविष्य केवल दो शिक्षकों के हाथ में है। विभाग के नियमानुसार 20 के लगभग बच्चों की संख्या पर संबंधित स्कूल में एक शिक्षक की नियुक्ति की जाती है। इसी नियम के अनुसार दुल्हेड़ा प्राथमिक स्कूल में दो शिक्षकों की कमी है। वहीं मौजूद दो शिक्षकों पर बच्चों की पढ़ाई के अलावा स्कूल के अन्य कार्यों का भार भी है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई पर तो कुप्रभाव पड़ ही रहा है।

जाहिदपुर के कन्या प्राथमिक विद्यालय में नहीं एक भी शिक्षक
कोसली क्षेत्र के गांव जाहिदपुर के  कन्या प्राथमिक स्कूल में एक भी अध्यापक नहीं है। गांव के लोग चंदा एकत्रित कर स्कूल में निजी अध्यापक के द्वारा बेटियों को शिक्षा दिला रहे हैं। गांव के पूर्व हैडमास्टर छोटू राम ने प्रदेश के एमएलए से लेकर सीएम तक गुहार लगाने के बाद भी गांव के स्कूल में आज तक कोई अध्यापक नहीं पहुंचा है। यह सिलसिला पिछले दो वर्ष से जारी है उनका कहना है कि एक तरफ सरकार बेटियों को पढ़ाने कि बात करती है, वहीं दूसरी और गांव के कन्या प्राथमिक पाठशाला में ही शिक्षक नही हैं। ऐसे में मात्र सरकार का यह नारा दिखावा ही साबित हो रहा है।  इसके अलावा क्षेत्र के गांव मलेशियावास, जखाला, गुगोढ, कोसली,  गढी, बव्वा, भाला सहित दो दर्जन से ज्यादा गांव ऐसे है, जहां पांचवीं कक्षा तक के शिक्षक एक या अधिकतम दो हैं। जखाला गांव में एक शिक्षक मीटिंग में गया तो एक शिक्षक पहली से पांचवीं कक्षा तक 53 बच्चों को कैसे पढ़ाएं । इसी प्रकार हर स्कूल का हाल है जहां  कही शिक्षक नही तो कही छात्र नही है। गांव मलेशियावास ने पहली से पांचवीं तक 23 बच्चों को पढ़ाने के लिए दो शिक्षक हैं।

जखाला स्कूल में नहीं है रसोई की व्यवस्था
गांव जखाला के स्कूल में बच्चो के लिए मिड-डे मील बनाने के लिए बनाई गई रसोई में छत ही टूटी पड़ी है, जिसके कारण बारिश आने पर बच्चों को मिड डे मील नहीं मिल पाता। वहीं स्कूल में बिजली व्यवस्था ठप है, जिसके चलते बच्चों को पर्याप्त कुर्सी-मेज होने के बावजूद भी कक्षा से बाहर जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। ऐसा ही हाल गांव भडंगी, कोहारड, गढी के स्कूलों का है।
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जिले के प्राथमिक स्कूलों में पहले की तुलना में काफी सुधार हुआ है। जिन स्कूलों में केवल एक ही शिक्षक हैं, वहां बच्चों की संख्या भी उसी अनुरूप है। वहीं रिक्त पदों को लेकर आला अधिकारियों को सूचना दी हुई ।
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आरपी सांगवान, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, रेवाड़ी
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