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Rewari News: अदालतों में अर्जी दाखिल करने के लिए ई-फाइलिंग अनिवार्य, पंजीकरण और सीएनआर नंबर की जांच भी जरूरी

Tue, 20 Oct 2026 01:14 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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रेवाड़ी। जिले की अदालतों में न्यायिक प्रक्रिया के तहत दाखिल होने वाली विविध अर्जियों के पंजीकरण और रिकॉर्ड के रखरखाव को लेकर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। इसके तहत अलग से पंजीकरण की आवश्यकता वाली अर्जियों को निर्धारित सीआईएस (केस इन्फॉर्मेशन सिस्टम) और ई-फाइलिंग प्रक्रिया के माध्यम से दाखिल करना अनिवार्य होगा।
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संबंधित अदालतों को ऐसी अर्जियों को रिकॉर्ड पर लेने या उन पर न्यायिक आदेश पारित करने से पहले उनके पंजीकरण संबंधी विवरण की जांच करनी होगी। जहां निर्धारित प्रक्रिया के तहत अलग सीएनआर नंबर जारी किया जाता है, वहां उसकी पुष्टि करना भी आवश्यक होगा।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सेशन डिवीजन रेवाड़ी में तैनात सभी न्यायिक अधिकारियों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं।
आदेश में कहा गया है कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट चंडीगढ़ की ओर से समय-समय पर विविध अर्जियों की उचित फाइलिंग, पंजीकरण और प्रक्रिया के संबंध में निर्देश जारी किए जाते रहे हैं। इसका उद्देश्य न्यायिक कार्यवाही का पूरा इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तैयार रखना और मामलों की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करना है।
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आदेश के अनुसार रिमांड पेपर, केस प्रॉपर्टी को सुपुर्दारी पर छोड़ने की अर्जियां, अतिरिक्त साक्ष्य प्रस्तुत करने, पक्षकारों को जोड़ने या हटाने और अन्य ऐसी विविध अर्जियां, जिनके लिए अलग पंजीकरण आवश्यक है।
अर्जियां सीआईएस व ई-फाइलिंग प्रक्रिया के माध्यम से दाखिल करनी होंगी। ऐसी अर्जियों को निर्धारित फ्रेश फाइलिंग या मिसलेनियस फाइलिंग विंडो के जरिये प्रस्तुत किया जाना चाहिए। संबंधित प्रक्रिया के तहत पंजीकरण भी करना होगा।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने निर्देश दिए हैं कि किसी भी अर्जी को अदालत के रिकॉर्ड पर लेने या उस पर न्यायिक आदेश पारित करने से पहले उसके फाइलिंग और पंजीकरण संबंधी विवरण की जांच की जाए।
यदि निर्धारित प्रक्रिया के तहत अर्जी के लिए अलग सीएनआर नंबर जारी किया जाना आवश्यक है, तो अदालत को यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित नंबर उपलब्ध हो। इससे अर्जी की पहचान और उससे संबंधित न्यायिक कार्यवाही का इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड व्यवस्थित रखा जा सकेगा।

सुविधा के नाम पर प्रक्रिया की अनदेखी नहीं होगी
आदेश में कहा गया है कि सेशन डिवीजन की कुछ अदालतों में ऐसी अर्जियों को निर्धारित सीआईएस या फ्रेश फाइलिंग प्रक्रिया से दाखिल और पंजीकृत होने की पुष्टि किए बिना सीधे स्वीकार किए जाने के मामले सामने आए हैं। यह निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। इससे न्यायिक रिकॉर्ड के रखरखाव में दिक्कत आने, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से कार्यवाही की निगरानी प्रभावित होने और भौतिक व इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में अंतर पैदा होने की आशंका रहती है। इसलिए केवल सुविधा के आधार पर निर्धारित प्रक्रिया की अनदेखी नहीं की जाएगी। हालांकि, आपात स्थिति या किसी विशेष न्यायिक अथवा प्रशासनिक निर्देश के तहत अलग प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

बार एसोसिएशन को भी भेजी आदेश की प्रति
जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आदेश की प्रति सेशन डिवीजन रेवाड़ी में तैनात सभी न्यायिक अधिकारियों, जिला अटॉर्नी, रेवाड़ी, बावल और कोसली बार एसोसिएशन के प्रधानों तथा न्यायिक शाखा के संबंधित अधीक्षक को सूचना और आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।

निर्देशों का उद्देश्य रिकॉर्ड व्यवस्थित रखना
वरिष्ठ अधिवक्ता अश्वनी तिवारी ने बताया कि जिला अदालत में चल रहे केस के दौरान किसी भी प्रकार की अर्जी लगाने पर ई-चैनल के माध्यम से नियम निर्धारित कर दिए गए हैं। अदालत में लंबित मामलों के दौरान लगने जाने वाले सभी आवेदनों को अब ई-फाइलिंग के जरिये ही स्वीकार किया जाएगा। इसके साथ किसी भी प्रकार के आवेदन जिसमें सुपुर्दारी कराना, रिमांड पेपर पेश करना सहित अन्य सभी छोटे-बड़े आवेदन शामिल किए गए हैं। ई-कोर्ट माध्यम से फाइल करने के दौरान सभी मिसलेनियस एप्लीकेशन ई-कोर्ट एप पर आसानी से देखी जा सकेगी।
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