संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। निरंतर खराब होती आबोहवा सेहत के लिए खतरनाक साबित हो रही है। एक्यूआई बढ़कर 449 पहुंचने के बाद प्रदूषण से बचने के लिए 70 फीसदी लोगों ने सुबह सैर करना छोड़ दिया है।
चिकित्सकों का कहना है कि सुबह के समय हवा में धूल के कण जमीन के नजदीक होते हैं। उस समय हवा भी नहीं चल रही होती है जिससे सैर करने निकलने लोगों के अंदर हवा के माध्यम से यह सूक्ष्म कण अंदर प्रवेश कर जाते हैं। इसके चलते सांस लेने में परेशानी होती है। इसी प्रकार शाम को प्रदूषण का स्तर अधिक रहता है जिससे शाम के 6-7 बजे के बाद स्मॉग छा जाता है। ऐसे में सुबह और रात में भोजन करने के बाद टहलना खतरनाक साबित हो सकता है।
अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ी
प्रदूषण के चलते अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। ऐसे लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। अस्पताल में डॉक्टर श्वांसरोगियों को घर रहने का सुझाव दे रहे हैं। अस्पताल में वायरल बुखार के 450, त्वचा रोग के 250-300, रेस्पिरेटरी मेडिसिन की ओपीडी में 100 से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। इनमें फेफड़ों में ही संक्रमण के ज्यादा पीड़ित हैं।
वर्जन
वायु प्रदूषण को देखते हुए नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल की जरूरत है। सर्द मौसम से शिशुओं को बुखार, खांसी, सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं होती हैं। -डॉ. मनीष, फिजिशियन।