शहर की दिशा और दशा को गति देने वाला टाऊन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग (टीसीपी) संसाधनों एवं स्टॉफ की भारी कमी के चलते बेदम नजर आ रहा है। जिले में चारों ओर अवैध निर्माण जोरों पर है, लेकिन विभाग की ओर से बीते छह महीनों में महज छह कार्रवाई की गई है।
टीसीपी विभाग की ओर से जिले मेें 16 कंट्रोल एरिया घोषित किए हुए हैं। इन कंट्रोल एरिया में भी बीते सालों में धड़ल्ले से अवैध निर्माण हुए। यही वजह रही कि धीरे-धीरे शहर की सूरत बिगड़ती चली गई। आज दिल्ली रोड, गढ़ी बोलनी रोड, नारनौल रोड, झज्जर रोड और नारनौल रोड चारों तरफ बेढंगे निर्माण दिखाई देते हैं। जानकारी के अनुसार जिले के धारूहेड़ा में छह, बावल में पांच, रेवाड़ी में तीन एवं कोसली में एक कंट्रोल एरिया घोषित किया हुआ है। गौरतलब है कि जिले की औद्योगिक और रिहायशी ग्रोथ का आंकलन कर प्रशासन कंट्रोल एरिया घोषित करता है। इस एरिया में बिना प्रशासन की अनुमति के निर्माण अवैध माना जाता है।
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-महीने में करनी होती है चार कार्रवाई
डिस्ट्रिक्ट टाऊन प्लानर की ओर से सभी कंट्रोल एरियाओं में अवैध निर्माण पर कार्रवाई करने के लिए महीने में चार कार्रवाई करनी होती हैं। डीटीपी की यह कार्रवाई समय पर पुलिस बल एवं अन्य प्रशासनिक अमला नहीं मिलने की स्थिति में अटक जाती है। जिसका फायदा सीधे प्रॉपर्टी डीलर उठाते हैं। विभाग को समय पर प्रशासनिक अमला नहीं मिलना भी अवैध निर्माण का एक बड़ा कारण माना जाता है।
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बिना एफआई के कैसे जुटाएगा विभाग डाटा
जिले के कंट्रोल एरिया में निर्माण संबधी डाटा एकत्रित करना फील्ड इनवेस्टीगेटर(एफआई) का काम होता है। लेकिन जिले डीटीपी विभाग में इस समय एक भी एफआई नहीं है, जबकि चार पोस्ट प्रस्तावित है। इसी के साथ नक्शे तैयार करने के लिए भी जिले में एक ही ड्राफ्टमैन है। ऐसे में विभाग किस तरह से नक्शे बना रहा होगा समझ से परे है।
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जिला योजनाकार विभाग में पदों की स्थिति
पद प्रस्तावित उपलब्ध
एफआई 04 0
ड्राफ्टमैन 04 01
क्लर्क 03 01
स्टेनो 03 0
एडीए 01 0
सर्वे खलाशी 05 02
पटवारी 02 01
पीओन 01 01
एटीपी 02 0
जेई 05 05
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विभाग की ओर से समय-समय पर अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। शहर की सूरत को बिगड़ने नहीं दी जाएगी। जिन भी स्थानों पर अवैध निर्माण हो रहे हैं, उनको हटाया जाएगा। विभाग इसके लिए तैयारी कर रहा है। प्रोपर्टी डीलर की कारागुजारियों का खामियाजा जरूरतमंद लोगों को उठाना पड़ता है। उनको चाहिए कि विभाग से जानकारी लेने के बाद ही ऐसी जगहों पर प्लॉट या दुकान खरीदें।
मंदीप सिहाग, डीटीपी, रेवाड़ी।