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गांव कोसली के सौ से अधिक लोग सेना में हैं अधिकारी

Wed, 28 Sep 2016 11:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
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गांव गाथा
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52 बंगला कोसली बांके कई हजार, घर-घर में चौधरी अर गली-गली सरदार। यह कहावत कोसली के लिए ही बनी है। करीब 800 वर्ष पुराने गांव में आज भी ये 52 बंगले वैसे ही हैं। इस गांव से सेना में भी सौ से अधिक अधिकारी कार्यरत हैं। इतनी प्रसिद्धी के बाद भी आज भी अहीरवाल के इस गांव का विकास नहीं हो सका है। गांव के लोग गांव से किसी बड़े नेता का नहीं होना इसका बड़ा कारण मानते हैं।
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800 साल पहले बसा था
सेवानिवृत कर्नल विजय कौसल, डॉ. सुचेत, पूर्व पंच राजीव यादव आदि ने बताया कि करीब 800  साल पहले गांव के एक हिस्से में बाबा मुक्तेश्वरपुरी तपस्या में लीन थे। शेखावटी के राजा कोसल सिंह यहां से गुजरते समय रात होने के कारण यहां रुके तो बाबा ने उन्हें यहीं बसने को कहा। उन्होंने कहा कि आपसे इस गांव को ना तो कोई जीत सकेगा और ना ही हरा सकेगा। आपके नाम से ही कोसल गोत्र होगा। इसके बाद राजा कोसल ने गांव बसाया और इसके बाद पठानों, नवाब फिरोजपुर झिरका एवं जाटों ने इस गांव पर तीन बार आक्रमण किया लेकिन वे यहां से हार कर ही गए। राजा ने गांव के चारों ओर चोवल खाई बनाकर गांव को किला का रूप दिया हुआ था। जिसका आज नामोनिशान नहीं है। पहले विश्वयुद्ध में इस गांव के 9 लोग वीरगति को प्राप्त हुए थे। 1857 से 1914 तक सेना में भर्ती बन्द कर देने के बाद गांव के लोग इंदौर और हैदराबाद जाकर सेना में नौकरी करने लगे। दूसरे विश्वयुद्ध में इस गांव से 247 लोगों ने भाग लिया। इनमें से छह वीरगति को प्राप्त हुए। अंग्रेजों ने गांव के लोगों की बहादुरी को देखते हुए यहां आठवीं तक स्कूल बनवाया। जिसमें ग्रामीणों ने सवा सौ बीघा जमीन दान की। आज यहां दस जमा दो स्कूल और कॉलेज चल रहा है।

गांव के युवक को मिला था जंगगी इनाम
 यह गांव इलाके में बहादुुरी के लिए जाना जाता है। इस गांव के एक युवक को जंगगी इनाम दिया गया था। जो आज भी उसके परिवार को दिया जा रहा है। इसके बाद इस गांव से 1939 से 45 की वार में एक दर्जन से अधिक लोगों को अपनी बहादुरी दिखाने पर सेना में अंग्रेजों ने अफसर बनाया।  इसी गांव के मेजर उमराव सिंह को मिलिट्री कार्स से सम्मानित किया गया। इस गांव से पांच ब्रिगेडियर, 25 कर्नल और तीनों सेनाओं में करीब 106 अफसर हैं।  इसके अतिरिक्त गांव के ही सुधीर यादव पुलिस मेेें आईजी हैं।
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प्रदेश को दिया पहला इंजीनियर
हरियाणा के पहले इंजीनियर महासिंह इसी गांव से थे। इसके अतिरिक्त आरपीएफ और बीएसएफ में भी 50 से अधिक अफसर इसी गांव से हैं। गांव के रावरामनारायण देवीलाल सरकार में एमएलए 1977 में बने थे।  इसके बाद 1987 में पुन: एमएलए बनने के बाद मंत्री बने। कोसली को लंबे इंतजार के बाद 1978 में सब तहसील का दर्जा मिला। कोसली के लिए लोग शिक्षा के लिए दूसरे शहरों में जाते हैं।

गांव में मठ है आस्था का केन्द्र
कोसली गांव का मठ कोसलीया गोत्र का आस्था का केन्द्र बना है। गांव में विद्यमान कोसली का मठ विदेेशों में भी प्रसिद्ध है। दुनिया के किसी भी कौने में कोसलीया गोत्र के घर पर शुभ कार्य विवाह, बच्चा जन्म होने यहां तक नौकरी पाने पर यहां कोसली मठ में मत्था टेकने जरूर आते हैं। कोसली मठ को कोसलीया गोत्र के ही नहीं बल्कि सभी गोत्रों के लोग पूजते हैं। ग्रामीणों ने अपनी जमीनों सरकारी सुविधाओं के लिए दी हैं। हर वर्ष भंडारे होते हैं।
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यह है मांगें
 गांव के लोगों ने बताया कि गांव में स्वीकृत नर्सिंग कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज एवं म्युनसिपलिटी कमेटी शीघ्र बने।
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