संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। आईजीयू में अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर संशय बरकरार है। शिक्षकों का कहना है कि एक तरफ मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मीरपुर के छंटनीशुदा 35 रिसोर्स पर्सन की सेवा बहाल करने के आदेश दिए हैं वहीं शिक्षकी की सेवा बहाल नहीं की जा रही है।
हुकटा का प्रतिनिधिमंडल मीरपुर के छंटनी ग्रस्त रिसोर्स पर्सन के साथ एक सप्ताह से सीएम से मिल रहा है। हुकटा का कहना है कि हाल ही में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्तियां होने से इंदिरा गांधी यूनिवर्सिटी में 5 से 12 वर्षों से कार्यरत 35 रिसोर्स पर्सन (गेस्ट फैकल्टी) को तुरंत प्रभाव से हटा दिया गया है। सीएम ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि मीरपुर के छंटनीग्रस्त सभी 35 रिसोर्स पर्सन की सेवाएं बहाल कर समायोजित की जाएं। उनके वादे के अनुसार विश्वविद्यालयों में कार्यरत सभी अस्थायी असिस्टेंट प्रोफेसरों को कॉलेज के एक्सटेंशन लेक्चरर की तर्ज पर कानून बनाकर सेवा सुरक्षा दी जाए ताकि महंगाई के दौर में उनका व उनके परिवारों का गुजारा हो सके।
हुकटा के प्रदेशाध्यक्ष विजय मलिक व प्राची जैन ने सयुंक्त बयान में बताया कि सीएम ने छंटनी किए गए रिसोर्स पर्सन्स को एडजस्ट करने के लिए मौके पर ही आदेश दिए हैं लेकिन अब तक गेस्ट फैकल्टी की जॉइनिंग नहीं हो पाई है। इस कारण सभी बहुत परेशान व हताश हैं। इस मामले पर प्रकाश डालते हुए हुकटा की आइजीयू इकाई की अध्यक्ष कर्मवती यादव ने बताया कि मीरपुर यूनिवर्सिटी में स्थायी भर्ती के बाद भी 41 स्वीकृत पद रिक्त बचे हुए हैं, जिन पर सभी छंटनीग्रस्त रिसोर्स पर्सन को 57,700 के वेतनमान पर बहाल किया जा सकता है।
विजय मलिक ने यह भी बताया कि आईजीयू मीरपुर के जैसे ही हरियाणा के बाकी सभी सरकारी विश्वविद्यालय में कार्यरत अस्थाई सहायक प्रोफेसर भी लगभग एक दशक से अपनी सेवाएं विश्वविद्यालयों को देते आए हैं एवं यूजीसी के सभी भर्ती मापदंडों को पूरा करते हैं। इनमें से कुछ ऐसे हैं जो भर्ती प्रक्रिया में आवेदन करने के आखिरी पड़ाव पर हैं या उनकी अप्लाई करने की उम्र जा चुकी है और वे केवल इसी नौकरी के आधार पर अपना व अपने परिवार का जीवन यापन कर रहे हैं। इस अवसर पर ज्योति, प्रशांत बंसल, प्राची जैन, अजय कुमार उपस्थित रहे।