रेवाड़ी। रेवाड़ी-काठूवास-नारनौल रेलखंड के दोहरीकरण का कार्य पूरा हो गया है। काठूवास से नारनौल तक कुल 24.12 किलोमीटर का दोहरीकरण 313 करोड़ रुपये की लागत से पूरा हो चुका है।
काठूवास से अटेली तक करीब 10.3 किलोमीटर का कार्य अगस्त में पूरा हुआ था जबकि अटेली से नारनौल तक शेष 14 किलोमीटर का काम अब पूर्ण कर लिया गया है।
इस खंड का सीआरएस (रेलवे सुरक्षा आयुक्त) निरीक्षण 15 फरवरी को प्रस्तावित है। निरीक्षण सफल रहने पर मार्च से ट्रेनों का संचालन शुरू करने की तैयारी है।
रेवाड़ी से नारनौल तक 52 किलोमीटर लंबी लाइन के दोहरीकरण के लिए कुल 665.72 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित है। अब तक 60 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा किया जा चुका है।
शेष 28 किलोमीटर रेवाड़ी-काठूवास खंड को इस वर्ष पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद रेलवे ने नारनौल-रींगस-फुलेरा (163.57 किमी) रेलखंड के दोहरीकरण के लिए 1542.38 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया है। इस पूरी परियोजना के पूर्ण होने पर रेवाड़ी जंक्शन एक महत्वपूर्ण रणनीतिक रेल केंद्र के रूप में उभरेगा।
-
65-70 किमी छोटा होगा सफर
रेवाड़ी-नारनौल-फुलेरा मार्ग के डबल होने से दिल्ली-रेवाड़ी-जयपुर मुख्य रूट का सशक्त विकल्प तैयार होगा। मौजूदा मार्ग की तुलना में यह रूट लगभग 65 से 70 किलोमीटर छोटा है, जिससे जयपुर, अहमदाबाद और मुंबई की यात्रा में समय की उल्लेखनीय बचत होगी। डबल लाइन होने से ट्रेनों को क्रॉसिंग के लिए स्टेशनों पर इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे गाड़ियों और यात्री ट्रेनों की औसत गति बढ़ेगी और लेटलतीफी में कमी आएगी।
-
तीर्थ यात्रियों और विद्यार्थियों को बड़ा लाभ
इस रूट के विकसित होने से खाटू श्याम और सालासर बालाजी जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को सीधा लाभ मिलेगा। शेखावाटी क्षेत्र के शिक्षा संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों और सेना के जवानों के लिए भी ट्रेनों की संख्या में बढ़ोतरी की संभावना है।
वर्जन
अटेली-नारनौल खंड का सीआरएस निरीक्षण 15 फरवरी को प्रस्तावित है। इसके बाद मार्च में ट्रेनों के संचालन की योजना है। यह रूट दिल्ली से रींगस, जयपुर और अहमदाबाद की दिशा में एक तेज और वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराएगा, जिससे रेवाड़ी और आसपास के यात्रियों को सुविधा मिलेगी।-पूजा मित्तल, सीनियर डीसीएम, जयपुर डिवीजन