रेवाड़ी। सरसों की बिजाई के लिए वर्तमान में तापमान अनुकूल है। ऐसे में किसान जल्द बिजाई करें। सरसों की अच्छी पैदावार के लिए उन्नत किस्मों के बीज के साथ सही मात्रा में खाद का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। यह सुझाव चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र बावल के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. धर्मबीर यादव ने किसानों को दिए हैं।
उन्होंने बताया कि बावल अनुसंधान केंद्र पर सरसों की उन्नत किस्मों आरएच-1424 और आरएच-725 के बीज उपलब्ध हैं। दोनों किस्में दक्षिण-पश्चिम हरियाणा की जलवायु के अनुकूल हैं। किसानों को तीन किलो के पैकेट में 150 रुपये प्रति किलो की दर से बीज दिया जा रहा है।
किसान सुबह 9 बजे से शाम साढ़े 4 बजे तक केंद्र पहुंचकर बीज खरीद सकते हैं। उन्होंने बताया कि सिंचित क्षेत्रों में एक किलो और वर्षा आधारित क्षेत्रों में डेढ़ किलो बीज प्रति एकड़ की दर से इस्तेमाल करें।
क्षेत्रीय निदेशक ने बताया कि अनुसंधान केंद्र पर एजोटोबैक्टर और पीएसबी जीवाणु खाद के टीके भी उपलब्ध हैं। इनकी कीमत 20 रुपये प्रति टीका रखी गई है। ये टीके फसल को नाइट्रोजन और फास्फोरस उपलब्ध करवाने में मदद करते हैं। इससे रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होगी। एक एकड़ के बीज उपचार के लिए एक टीका पर्याप्त रहेगा।
तना गलन बीमारी से बचाव के लिए बिजाई से पहले करें बीज उपचार
डॉ. यादव ने बताया कि सरसों की फसल को तना गलन बीमारी से बचाने के लिए बीज उपचार जरूरी है। किसान पहले दो ग्राम प्रति किलो बीज की दर से कार्बेन्डाजिम से सूखा उपचार करें। इसके आधे घंटे बाद एजोटोबैक्टर और पीएसबी जीवाणु टीके से उपचार करें। इसके बाद बीज को एक घंटे तक छाया में सुखाकर बिजाई करें।
डीएपी की जगह 75 किलो सिंगल सुपर फॉस्फेट डालने की सलाह
डॉ. धर्मबीर यादव ने बताया कि सरसों की बिजाई के समय प्रति एकड़ 75 किलो सिंगल सुपर फॉस्फेट डालें। सरसों की फसल के लिए डीएपी के मुकाबले सिंगल सुपर फॉस्फेट बेहतर है। इसके साथ ही 10 किलो जिंक सल्फेट (21 प्रतिशत) या 6 किलो जिंक सल्फेट (33 प्रतिशत) और 25 किलो यूरिया प्रति एकड़ की दर से डालें। उन्होंने कहा कि किसान बिजाई के दौरान खाद और बीज की मात्रा का विशेष ध्यान रखें। किसी भी प्रकार की तकनीकी जानकारी या सलाह के लिए क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र बावल के वैज्ञानिकों अथवा कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।