संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। 10वीं और 12वीं कक्षा की परीक्षा में कम अंक लाने वाले विद्यार्थियों को निराश नहीं होना चाहिए। कम अंक आने के बाद भी निरंतर मेहनत कर मुकाम पाया जा सकता है। तमाम लोगों ने कम अंक पाने के बाद भी बड़े पदों पर कार्यरत हैं। ऐसे लोगों से सीख लेनी चाहिए। ये बातें अंक ये बातें गांव बिठवाना स्थित पीएम श्री विद्यालय के प्राचार्य डाॅ. दुष्यंत और अध्यापिका निशा कुमारी ने बच्चों का हौसला बढ़ाते हुए कहीं।
गांव बिठवाना स्थित पीएम श्री विद्यालय की अध्यापिका निशा कुमारी ने बताया कि जब वह बीकॉम में थीं तो फाइनल परीक्षा में 52% अंक ही प्राप्त हुए थे। अन्य छात्र-छात्राएं अधिक नंबर लाई थीं। इससे वह काफी उदास थीं।
माता-पिता के समझाने पर उनके अंदर आत्मविश्वास जागा और कठिन परिश्रम से पढ़ाई की और आज वह अध्यापिका हैं और विद्यार्थियों को शिक्षा दे रही हैं। कम अंक पाने वाले विद्यार्थियों को घबराना नहीं चाहिए। विद्यार्थी अगर ठान ले तो वह कुछ भी कर सकता है।
कठिन परिश्रम से ही सफलता हासिल होती है। यदि विद्यार्थी ठान ले तो कम अंक प्राप्त करने के बाद भी बड़ी से बड़ी परीक्षा में बैठ कर सफलता हासिल कर सकता है।
पीएम श्री विद्यालय के प्रधानाचार्य डाॅ. दुष्यंत कुमार ने बताया कि 10वीं और 12वीं में जिन बच्चों के नंबर कम आए हैं, उन्हें निराश होने की जरूरत नहीं है। हमेशा देखने को आया है कि कम अंक आने पर मां-बाप भी बच्चों पर दबाव बनाते हैं जो की उचित नहीं है।
उन्होंने बताया कि उन्होंने वर्ष 1982 में माध्यमिक शिक्षा प्रथम श्रेणी में पास की। दसवीं परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास की व स्नातक परीक्षा वर्ष 1988 में प्रथम श्रेणी 64.4% अंकों के साथ पास की। परा स्नातक परीक्षा अंग्रेजी विषय में वर्ष 1990 में पास की थी। इसके बाद पीएचडी की। दिसम्बर 1993 में हरियाणा शिक्षा विभाग में बतौर अंग्रेजी प्रवक्ता के पद पर नियुक्त प्राप्त की। बतौर अंग्रेजी प्रवक्ता की नौकरी करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी की परीक्षा पास की। इस सफलता के पीछे एक अनुशासन के साथ अपनी पढ़ाई पूरी की।