संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। हरियाणा सरकार की ओर से टाहना दीपालपुर में सरसों उत्कृष्टता केंद्र (सीओईएम) की स्थापना के प्रस्ताव पर कार्यवाही शुरू कर दी गई है। सीओईएम का विस्तृत प्रारूप तैयार कर लिया गया है। इसकी पुष्टि हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने विधानसभा में की है।
सरसों उत्कृष्टता केंद्र खुलने से रेवाड़ी समेत झज्जर, महेंद्रगढ़, नारनौल, गुरुग्राम के साथ ही राजस्थान की सीमा पर स्थित गांवों के किसानों को लाभ होगा। इस उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना के लिए 20 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। विभाग के पास एनएच-71 पर (रेवाड़ी-झज्जर रोड) पर लगभग 23 एकड़ भूमि है। यह भूमि हरियाणा भूमि सुधार विकास निगम (एचएलआरडीसी) के पास वर्ष 1998 से 25 वर्ष के लिए 1000 रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष की दर से पट्टे पर है। एचएलआरडीसी ने किसानों को वार्षिक आधार पर पट्टे पर भूमि दी है। पट्टा इस रबी सीजन 31 मार्च 2025 तक का है। करीब दो वर्ष पहले 2 मार्च 2023 को आयोजित बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों और चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय हिसार के विशेषज्ञों व वैज्ञानिकों ने टाहना में सरसों उत्कृष्टता केंद्र के प्रस्ताव पर सहमति जताई थी।
डहीना व कव्वाली गांव में बीज बिक्री केंद्र खोलने का प्रस्ताव : हरियाणा बीज विकास निगम (एचएसडीसी) की ओर से डहीना व कव्वाली गांव में बीज बिक्री केंद्र खोलने का प्रस्ताव है। इसकी प्रक्रिया अभी चल रही है। बीज बिक्री केंद्र खुलने से किसानों को काफी लाभ होगा। इससे किसानों को नई किस्म के बारे में पता चलेगा। संवाद
सरसों उत्कृष्टता केंद्र खुलने से किसानों को होंगे कई तरह के फायदे
सरसों उत्कृष्टता केंद्र खुलने किसानों को कई तरह के फायदे होंगे। किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन केंद्रों में नई तकनीक का इस्तेमाल करके बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और उनकी फसल की उत्पादकता भी बढ़ेगी। केंद्र में नई किस्मों के पौध तैयार किए जाएंगे, अनुसंधान भी किए जाएंगे। किसानों को प्राकृतिक नेचुरल खेती से भी जोड़ा जाएगा।
सरसों की बिजाई में हुआ इजाफा
वर्तमान में जिले में करीब 78 हजार हेक्टेयर में सरसों की खेती हो रही है। वर्ष 2015 में 62 हजार हेक्टेयर में सरसों की बिजाई हुई थी। 2012 में 63 हजार हेक्टेयर में सरसों की खेती हुई। सरसों की बिजाई में काफी इजाफा हुआ है। 1 एकड़ सरसों में करीब 8 से 10 क्विंटल उत्पादन होता है। न्यूनतम समर्थन मूल्य 5950 रुपये के हिसाब से सरसों की खरीद की जा रही है।
वर्जन
टाहना दीपालपुर में सरसों का उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना के लिए 2 वर्ष पहले प्रस्ताव भेजा गया था। अब इस पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उत्कृष्टता केंद्र खुलने से किसानों को कई तरह के फायदे होंगे। नई तकनीकों का इस्तेमाल करके बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार किए जाएंगे। नेचुरल फार्मिंग के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। आसपास के जिलों के किसानों को भी लाभ होगा।-डॉ. अनिल यादव, खंड कृषि अधिकारी, कृषि विभाग रेवाड़ी।